चिकलथाना के जालना रोड पर करीब 40 हजार वर्गफुट निर्माण का मामला।
वर्ष 2019 में केवल 55 वर्ग मीटर में एक कमरे की अनुमति ली गई थी।
निर्धारित समय में काम पूरा नहीं होने से अनुमति की वैधता समाप्त हो गई थी।
निर्माण स्थल पर मजदूर की मौत के बाद मनपा की निगरानी व्यवस्था पर सवाल।
सभापति अनिल मकरिये ने आठ दिन में जांच पूरी कर कार्रवाई के निर्देश दिए।
Chhatrapati Sambhajinagar Chikalthana Illegal Construction: छत्रपति संभाजीनगर के चिकलथाना में जालना रोड पर करीब 40 हजार वर्गफुट में निर्माण होने का मामला मनपा की स्थायी समिति की बैठक में उठा। संबंधित भूखंड पर वर्ष 2019 में केवल 55 वर्ग मीटर में एक कमरे के निर्माण की अनुमति ली गई थी, जिसकी वैधता भी समाप्त हो चुकी थी। निर्माण स्थल पर मजदूर की मौत के बाद मामला गंभीर हो गया है। सभापति अनिल मकरिये ने आठ दिन में जांच पूरी कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने के निर्देश दिए।
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका की निर्माण अनुमति व्यवस्था और अवैध निर्माण पर निगरानी के दावों के बीच चिकलथाना में बड़ा मामला सामने आया है। जालना रोड स्थित एक भूखंड पर करीब 40 हजार वर्गफुट क्षेत्र में निर्माण कार्य होने की जानकारी सामने आई, जबकि यहां वर्ष 2019 में महज एक कमरे के लिए 55 वर्ग मीटर निर्माण की अनुमति ली गई थी। निर्धारित समय में निर्माण पूरा नहीं होने के कारण यह अनुमति भी समाप्त हो चुकी थी।
इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कैसे हुआ और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली, यह सवाल अब मनपा प्रशासन के सामने है। निर्माण स्थल पर एक मजदूर की मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक में भाजपा नगरसेवक रवि कावडे ने चिकलथाना के इस निर्माण का मुद्दा उठाया। बैठक में नगर रचना विभाग की सहायक संचालक दीपाली पाटील ने बताया कि संबंधित भूखंड पर वर्ष 2019 में एक कमरे के निर्माण के लिए 55 वर्ग मीटर की अनुमति दी गई थी। निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने से अनुमति की वैधता समाप्त हो गई थी।
इसके बावजूद करीब 40 हजार वर्गफुट में निर्माण कार्य शुरू होने का मामला सामने आया। इस जानकारी के बाद सदस्यों ने सवाल उठाया कि अनुमति समाप्त होने के बाद निर्माण गतिविधियों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी किस विभाग की थी।
स्थायी समिति सभापति अनिल मकरिये ने अतिक्रमण हटाने वाले विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में गरीबों की छोटी दुकानों और सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण हटाने के लिए विभाग तत्परता दिखाता है, लेकिन इतने बड़े निर्माण पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
मामले की गंभीरता को देखते हुए सभापति अनिल मकरिये ने आठ दिनों के भीतर जांच पूरी करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। अब मनपा प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि निर्माण किसकी अनुमति या जानकारी में हुआ और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।