Sambhajinagar Indigo Flight Emergency Bhagwat Karad: छत्रपति संभाजीनगर, दिल्ली से आइजोल जा रही इंडिगो की उड़ान में एक यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। विमान में मौजूद चिकित्सक डॉ. भागवत कराड ने तत्काल यात्री की जांच कर प्राथमिक चिकित्सा में मदद की और ऑक्सीजन उपलब्ध कराई। आइजोल पहुंचते ही यात्री को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
छत्रपति संभाजीनगर, दिल्ली से आइजोल जा रही इंडिगो की उड़ान में शुक्रवार को उस समय चिंता का माहौल बन गया, जब एक यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई। यात्री को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। इसी दौरान विमान में मौजूद पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और चिकित्सक डॉ. भागवत कराड यात्री की मदद के लिए आगे आए।
दिल्ली से आइजोल के लिए इंडिगो की उड़ान संख्या 6E 291 रवाना होने के बाद यात्री की हालत अचानक गंभीर हुई। सांस लेने में परेशानी देखकर विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में चिंता बढ़ गई।
यात्री की स्थिति की जानकारी मिलते ही डॉ. कराड उसके पास पहुंचे। उन्होंने यात्री की स्थिति का जायजा लिया और विमान में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों के जरिए तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने में सहयोग किया।
सांस लेने में परेशानी को देखते हुए यात्री को ऑक्सीजन सिलेंडर की सहायता से ऑक्सीजन दी गई। डॉ. कराड ने विमान के कर्मचारियों के सहयोग से यात्री को आवश्यक प्रारंभिक चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद की।
यात्री की स्थिति को देखते हुए विमान के आइजोल पहुंचने के बाद आगे के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। विमान के हवाई अड्डे पर उतरते ही यात्री को ऑक्सीजन की सुविधा के साथ एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया।
इस तरह विमान में समय पर मिली चिकित्सा सहायता के बाद यात्री को सुरक्षित रूप से विमान से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। आगे अस्पताल में यात्री का उपचार शुरू किया गया।
डॉ. भागवत कराड सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के साथ चिकित्सा क्षेत्र से भी जुड़े रहे हैं। विमान में आपात स्थिति सामने आने पर उन्होंने पद और औपचारिकताओं से अलग हटकर चिकित्सक के रूप में यात्री की सहायता की।
आपात स्थिति में उपलब्ध सीमित संसाधनों के बीच तत्काल चिकित्सा मदद उपलब्ध कराने की उनकी पहल विमान में मौजूद लोगों के लिए महत्वपूर्ण रही। इस घटना ने यह भी दिखाया कि किसी व्यक्ति को अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की भूमिका अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहती।