Chandrapur OBC Community Demands: ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और आरक्षण के वास्तविक लाभकी स्पष्ट तस्वीर सामने लाने के लिए जातिनिहाय जनगणना जरूरी है। इस मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने पिछले 10 वर्षों से अधिवेशन, उपोषण, मोर्चे, धरना और रास्ता रोको आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। अब महासंघ ने दिल्ली के रामलीला मैदान में ठिय्या आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के जिलाध्यक्ष रामदास कामडी, ओबीसी कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष देवराव दिवसे, ओबीसी युवा महासंघ के सदस्य अक्षय येरगुडे और राष्ट्रीय ओबीसी महिला महासंघ की महासचिव मनीषा बोबडे ने मंगलवार को बातचीत में महासंघ की भूमिका और आगामी आंदोलन की दिशा स्पष्ट की।
23 मार्च 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जातिनिहाय जनगणना की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था। वहीं 14 अगस्त को जनगणना के दूसरे चरण का राजपत्र प्रकाशित होने के बाद भी ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं होने की बात महासंघ ने सामने रखी। इसके बाद आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है। 26 अगस्त को नागपुर में महाराष्ट्रस्तरीय नियोजन बैठक हो चुकी है। अब 20 सितंबर को हैदराबाद में राष्ट्रीय नियोजन बैठक होगी। केंद्र सरकार द्वारा शीतकालीन अधिवेशन की तारीख तय किए जाने के बाद रामलीला मैदान के ठिय्या आंदोलन की अंतिम तारीख घोषित की जाएगी।
11 राष्ट्रीय अधिवेशन, 14 मांगों को मंजूरी का दावा महासंघ की ओर से अब तक 11 राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किए जा चुके हैं। विभिन्न राज्यों के ओबीसी समाज की समस्याओं पर प्रस्ताव पारित कर सरकार से लगातार मांगों का फॉलोअप किया गया। चंद्रपुर में ओबीसी योद्धा रवींद्र टोंगे ने 21 दिन, जबकि चिमूर में अक्षय लांजेवर और अजित सुकारे ने आठ दिन आमरण उपोषण किया। पदाधिकारियों के अनुसार, इस संघर्ष के चलते ओबीसी समाज की 14 मांगों को सरकार से मंजूरी मिली है।
ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, मैट्रिकपूर्व छात्रवृत्ति, गणवेश, महाज्योति की योजनाएं, विदेशी छात्रवृत्ति और छात्रावास में प्रवेश नहीं मिलने पर आधार योजना के लिए भी महासंघ ने प्रयास किए। महाराष्ट्र में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए 72 छात्रावास शुरू होना इन प्रयासों का प्रमुख परिणाम बताया गया। साथ ही नवोदय विद्यालयों और मेडिकल शिक्षा में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का भी उल्लेख किया गया।
ओबीसी कर्मचारी महासंघ जिलाध्यक्ष देवराव दिवसे ने कहा कि "महाराष्ट्र में ओबीसी कल्याण के लिए स्वतंत्र विभाग कार्यरत है। इसी तर्ज घर केंद्र में भी स्वतंत्र ओबीसी मंत्रालय होना चाहिए, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और आर्थिक विकास के लिए स्वतंत्र नीति व बजटीय प्रावधान जरूरी है।"
ओबीसी युवा महासंघ सदस्य अक्षय येरगुडे ने कहा कि "ओबीसी विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सुविधाओं और आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगातार प्रयास जरूरी है। नवोदय, मेडिकल शिक्षा, छात्रवृत्ति और महाज्योति योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचना चाहिए। नौकरियों में आरक्षित पदों का बैकलॉग भी तत्काल भरा जाना चाहिए।
राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ चंद्रपुर जिलाध्यक्ष रामदास कामडी ने कहा कि "ओबीसी की सटीक आबादी सामने आए बिना उनके विकास का उचित नियोजन संभव नहीं है। स्वतंत्र कॉलम के साथ जातिनिहाय जनगणना होने तक हमारा संविधानिक मार्ग से संघर्ष जारी रहेगा, हमारा आंदोलन किसी समाज के विरोध में नहीं, बल्कि ओबीसी के न्यायसंगत अधिकारों के लिए है।
राष्ट्रीय ओबीसी महिला महासंघ महासचिव मनीषा बोबडे ने कहा कि "ओबीसी समाज के विकास में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक प्रगति के अवसर महिलाओं तक पहुंचने चाहिए, आगामी आंदोलन में महिलाओं की व्यापक भागीदारी रहेगी और जातिनिहाय जनगणना सहित सभी लंबित मांगों के लिए संघर्ष को और संगठित किया जाएगा।"