

Maratha OBC Face-Off Intensifies: महाराष्ट्र के जालना जिले स्थित अंतरवाली सराटी में आरक्षण को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। एक ओर मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल का अनशन रविवार को 9वें दिन भी जारी रहा, वहीं दूसरी ओर ओबीसी आरक्षण के संरक्षण की मांग को लेकर ओबीसी नेता मंगेश ससाणे ने सोनिया नगर क्षेत्र में सांकेतिक अनशन शुरू कर दिया है। एक ही क्षेत्र में दोनों समुदायों के आमने-सामने आने से पूरे जिले में तनाव बढ़ गया है, जिसे देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
29 अगस्त से अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद उन्होंने किसी भी तरह का चिकित्सा उपचार लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। शनिवार रात जांच के लिए पहुंची मेडिकल टीम को उन्होंने दो बार वापस लौटा दिया।
जरांगे का कहना है कि जब तक हैदराबाद गजट के आधार पर मराठा-कुणबी की 58 लाख प्रविष्टियों के तहत जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाते, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज को ओबीसी के हक का हिस्सा नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें उनका अपना अधिकार मिलना चाहिए।
सरकार की ओर से गतिरोध समाप्त करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। विधायक प्रसाद लाड के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में मांगों को लिखित रूप देने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने मनोज जरांगे से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मांगों पर संज्ञान लिया है और कानूनी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह फैसला अदालत में टिक सके।
दूसरी ओर, ओबीसी नेता मंगेश ससाणे ने सरकार पर एकतरफा रुख अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फर्जी कुणबी प्रमाणपत्रों के जरिए स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में ओबीसी के आरक्षित पदों पर घुसपैठ की जा रही है। ससाणे ने सवाल उठाया कि क्या सरकार सिर्फ मनोज जरांगे की बात सुनेगी या ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की भी रक्षा करेगी।
ओबीसी नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे अपने OBC आरक्षण में किसी भी प्रकार की सेंधमारी बर्दाश्त नहीं करेंगे। दोनों पक्षों के अपनी-अपनी मांगों पर अड़े रहने से राज्य में राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहरा गया है।