चंद्रपुर में प्रकाश आंबेडकर और संजय राउत (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

चंद्रपुर मनपा नतीजों के बाद VBA का बड़ा एक्शन, पदाधिकारियों की कर दी छुट्टी, छिड़ा सियासी संग्राम!

Chandrapur Municipal Corporation Crisis: चंद्रपुर मनपा में हार के बाद कांग्रेस में घमासान। वडेट्टीवार और धानोरकर में ब्लेम गेम। भाजपा को साथ देने पर वंचित बहुजन आघाडी की शहर कार्यकारिणी बर्खास्त।

प्रिया जैस

Sanjay Raut Chandrapur Statement: चंद्रपुर मनपा में भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) द्वारा गठबंधन करते हुए सत्ता स्थापन करने से निर्माण हुए राजनीतिक भूचाल के बाद अब चर्चाओं का बाजार गर्म है। चंद्रपुर मनपा में भाजपा-शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन के नए पैटर्न को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक गलियारों में उथलपुथल मची है।

वहीं दूसरी ओर इस नए गठबंधन को अप्रत्यक्ष रूप से साथ देने पर वंचित बहुजन आघाडी ने अपने स्थानीय पदाधिकारियों की छुट्टी कर दी है। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं में भी अब हार का ठीकरा एक दूसरे पर फोड़ते हुए ब्लेम गेम शुरू हो गया है। किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं होने से स्थानीय मनपा में सत्ता स्थापना को लेकर विगत 15 दिनों से अनिश्चितता बनी हुई थी।

कांग्रेस गठबंधन यहां बहुमत के करीब होने से मनपा में कांग्रेस गठबंधन की सत्ता स्थापित होने की उम्मीद जताई जा रही थी। किंतु महापौर चुनाव के ऐन वक्त पर यहां राजनीतिक भूचाल आ गया जब पिछले कुछ वर्षों से कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) ने यहां गठबंधन कर सत्ता स्थापित की।

विश्वासघात हुआ

मनपा में महापौर चुनाव में कांग्रेस को मिली पराजय के लिए कांग्रेसी सांसद प्रतिभा धानोरकर ने शिवसेना (यूबीटी), वंचित बहुजन आघाडी और एमआईएम जैसी सेकुलर पार्टियों पर विश्वासघात कपा आरोप लगाया। धानोरकर के इस आरोपों का जवाब देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने कहा कि, चंद्रपुर मनपा में कांग्रेस को मिली पराजय के लिए शिवसेना (यूबीटी) को जिम्मेदार ठहराने में कोई अर्थ नहीं है। इस मनपा में कांग्रेस के 27 पार्षद थे, इसके बावजूद कांग्रेस सत्ता से दूर हुई, कांग्रेस को इस बात की शर्म आनी चाहिए। इस पराजय के लिए कौन जिम्मेदार है इसकी उच्चस्तरीय जांच होने की आवश्यकता है।

वरिष्ठ नेता जिम्मेदार

कांग्रेसी विधायक विजय वडेट्टीवार ने इस हार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता के चलते उन्हें मनपा चुनाव में एक कदम पीछे लेना पड़ा था। अगर पार्टी आलाकमान ने इस मनपा चुनाव की जिम्मेदारी किसी एक को दी होती तो शायद कांग्रेस को मनपा में सत्ता से दूर नहीं होना पड़ता था। हमें इसका आत्म परीक्षण करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि, जिले में मतदाताओं ने नगर पालिकाओं के चुनाव में कांग्रेस को उल्लेखनीय सफलता दिलाई, अब मनपा में भी मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान किया किंतु मनपा में कांग्रेस सत्ता स्थापित नहीं कर सकी, इसके लिए वे जिले के मतदाताओं से क्षमायाचना करते है।इस बीच कांग्रेस के तत्कालीन महानगर जिलाध्यक्ष रितेश तिवारी ने आरोप लगाया कि, मनपा में कांग्रेस को सत्ता से दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग हुई है।

वीबीए ने हटाये पदाधिकारी

भाजपा की सत्ता के लिए अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का साथ देने से क्षुब्ध होकर वंचित बहुजन आघाडी की प्रदेश इकाई ने पार्टी के स्थानीय शहर अध्यक्ष स्नेहल रामटेके समेत उनकी अध्यक्षता में बनी चंद्रपुर शहर की समूची कार्यकारिणी को बर्खास्त कर दिया है। पार्टी के प्रदेश महासचिव किसन चव्हाण ने मनपा महापौर चुनाव परिणाम सामने आने के तुरंत बाद मंगलवार रात इस संदर्भ में पत्र जारी किया।

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