Chandrapur Municipal Corporation Development Fund: चंद्रपुर महानगरपालिका में नियमित सर्वसाधारण सभाएं नहीं होने का सीधा असर शहर के विकास पर पड़ता दिखाई दे रहा है। चालू वर्ष में अब तक दलित बस्ती सुधार योजना, महाराष्ट्र नगरोत्थान योजना, दलितेत्तर योजना और नाविन्यपूर्ण योजना के प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय को नहीं भेजे जा सके हैं। इन योजनाओं के माध्यम से हर साल मिलने वाले करीब 10 से 15 करोड़ रुपए के विकास निधि पर भी अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
ऐसे में शहर के वंचित और जरूरतमंद क्षेत्रों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की आशंका व्यक्त की जा रही है। महानगरपालिका की पंचवर्षीय चुनाव प्रक्रिया के बाद मार्च में महापौर का चुनाव हुआ था। इसके बाद पिछले सात महीनों में महापौर संगीता खांड़ेकर के कार्यकाल में केवल दो नियमित सर्वसाधारण सभाएं होने की बात सामने आई है। 27 मार्च को बजट सभा तथा 30 अप्रैल को नियमित सभा हुईं।
इसके अलावा 11 मई को जलसंकट के मुद्दे पर विशेष सभा बुलाई गई थी, लेकिन जलसंकट का समाधान अब तक नहीं हो सका है। इसी बीच नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए 28 अक्टूबर तक आचारसंहिता लागू है। ऐसे में इस वर्ष इन योजनाओं का लाभ शहरवासियों को मिल पाएगा या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष की ओर से महापौर संगीता खांडेकर और आयुक्त अकुनुरी नरेश पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर उदासीनता का आरोप लगाया जा रहा है।
अंतिम समय में रद्द कर दी गई। बाद में इसे 5 अगस्त को आयोजित किया गया, लेकिन सभा में हुए हंगामे के कारण महज 10 मिनट में सभा तहकूब करनी पड़ी। नियमानुसार नियमित रूप से महासभा आयोजित किया जाना आवश्यक है। इसके बावजूद सभाएं नहीं होने से विकास संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।
चंद्रपुर शहर महानगरपालिका दलित बस्ती सुधार, नगरोत्थान, दलितेत्तर और नाविन्यपूर्ण योजनाओं के लिए जिला नियोजन एवं विकास समिति (डीपीडीसी) के माध्यम से निधि मंजूर की जाती है। इसमें खनिज विकास निधि का भी उपयोग होता है। संबंधित योजनाओं के प्रस्ताव अक्टूबर के अंत तक जिलाधिकारी कार्यालय को भेजे जाने अपेक्षित थे, लेकिन महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अब तक प्रस्ताव तैयार नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।