सिद्धबली इस्पात कंपनी में कामगार प्रविण कुडे की मौत के बाद औद्योगिक सुरक्षा पर सवाल।
हादसे से जुड़ी जानकारी लेने पहुंचे प्रतिनिधि को उपसंचालक कार्यालय बंद मिला।
नागपुर से संचालन और चंद्रपुर में अधिकारी की उपलब्धता को लेकर सवाल।
जिले के करीब 70 बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा निगरानी पर उठे सवाल।
शासन से स्वीकृत पदों, रिक्तियों, निरीक्षणों और कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग।
Chandrapur Industrial Safety Labour Department: चंद्रपुर की सिद्धबली इस्पात कंपनी में कामगार प्रविण कुडे की मौत के बाद हादसे से जुड़ी जानकारी जुटाने पहुंचे प्रतिनिधि को सुरक्षा व आरोग्य संचालनालय का जिला कार्यालय बंद मिला। जिले के करीब 70 बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा निगरानी और अधिकारियों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं।
चंद्रपुर, कोयला खदानों, बिजली उत्पादन केंद्रों और इस्पात कंपनियों के लिए पहचाने जाने वाले चंद्रपुर जिले में औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हजारों कामगार जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा की निगरानी करने वाले विभाग के जिला कार्यालय में ही अधिकारी उपलब्ध न हों, तो जवाबदेही को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
सोमवार, 12 अक्टूबर को दोपहर करीब 4:15 बजे उद्योग भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित महाराष्ट्र शासन के उपसंचालक, सुरक्षा व आरोग्य संचालनालय के कार्यालय का दरवाजा बंद मिला। सिद्धबली इस्पात कंपनी में कामगार प्रविण कुडे की मौत के बाद हादसे से संबंधित अतिरिक्त जानकारी जुटाने के लिए प्रतिनिधि कार्यालय पहुंचा था। हालांकि, वहां कार्यालय बंद मिला।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित उपसंचालक नागपुर में रहते हैं और उनके पास कई जिलों का प्रभार है। बताया जाता है कि चंद्रपुर कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या सीमित है और अधिकारी की नियमित उपलब्धता नहीं रहती। यह भी कहा जा रहा है कि अधिकारी के चंद्रपुर आने के लिए पखवाड़े में एक दिन निर्धारित हो सकता है।
हालांकि, अधिकारी की निर्धारित उपस्थिति, कार्यालय के कामकाज और कर्मचारियों की वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विभाग को अपनी व्यवस्था स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि औद्योगिक दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में जानकारी और शिकायतों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
सिद्धबली इस्पात कंपनी में प्रविण कुडे की मौत के बाद उनके परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और कंपनी का पक्ष सामने आना जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हादसे के बाद विभाग ने क्या जांच की और सुरक्षा नियमों के पालन की स्थिति क्या थी।
क्या कंपनी में इससे पहले भी दुर्घटनाएं हुई थीं? क्या मशीनों, विद्युत उपकरणों और सुरक्षा साधनों की जांच की गई? कामगारों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया था या नहीं? सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई हुई थी? इन सवालों के जवाब संबंधित विभाग के रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट से ही मिल सकते हैं।
चंद्रपुर जिले में करीब 70 बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान होने की जानकारी सामने आई है। वेकोलि की कोयला खदानों, चंद्रपुर सुपर थर्मल पावर स्टेशन और विभिन्न इस्पात कंपनियों में कामगारों को भारी मशीनरी, बिजली, कोयले की धूल, ऊंचाई और गर्म धातु से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में औद्योगिक सुरक्षा की निगरानी केवल निरीक्षण पुस्तिका या जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह सकती। नियमित निरीक्षण, दुर्घटनाओं की निष्पक्ष जांच और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।
शासन को स्पष्ट करना चाहिए कि चंद्रपुर कार्यालय में कितने पद स्वीकृत हैं, कितने पद रिक्त हैं और पिछले एक वर्ष में कितने औद्योगिक निरीक्षण किए गए। दुर्घटनाओं के बाद कितनी जांच हुई और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कितनी कार्रवाई की गई, इसका विवरण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कामगारों की सुरक्षा से जुड़ा विभाग समय पर उपलब्ध रहे और हादसों के मामलों में जवाबदेही तय हो-यह औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है।