

Nashik Road Jail Prisoners Mobile Video: अत्यधिक संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए पहचाने जाने वाले नासिक रोड मध्यवर्ती कारागार की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
जेल के क्वारंटीन वार्ड में शातिर कैदी बेखौफ घूमते, कैरम का आनंद लेते और मोबाइल पर उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है।
इस पूरे मामले से जेल की कड़े सुरक्षा दावों की धज्जियां उड़ गई हैं, जिसके बाद कारागार महानिरीक्षक सुहास वारके द्वारा मामले का संज्ञान लेकर प्रत्यक्ष जांच करने की मांग जोर पकड़ रही है।
जेल के मुख्य द्वार में प्रवेश करते समय साधारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक पर सख्त पाबंदी होती है। ऐसे में नासिक रोड जेल में बंद कैदियों के हाथों में सीधा स्मार्टफोन पहुंचना एक अनुत्तरित और गंभीर सवाल है।
जमानत पर बाहर आए कुछ पूर्व कैदियों के अनुसार, जेल के वरिष्ठ अधिकारियों और कुछ संदेहास्पद कैदियों की मिलीभगत से यह सब नियम विरुद्ध खेल चल रहा है। यहां तैनात वरिष्ठ अधिकारियों का कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर कोई नियंत्रण नहीं बचा है।
इस स्थिति को देखते हुए नागरिकों और पूर्व कैदियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के स्थानांतरण और जांच के बाद निलंबन की मांग की है। उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी आयुष प्रसाद ने महज दो दिन पहले ही इस जेल का दौरा किया था।
इन्स्टाग्राम पर वायरल हुआ वीडियो 17 अक्टूबर से 23 दिसंबर 2025 के बीच का बताया जा रहा है, जिसमें क्वारंटीन वार्ड में बंद कैदी सनी अरुण पगारे और श्रीजय उर्फ गौरव खाड़े नजर आ रहे हैं। इनमें से श्रीजय खाड़े अगस्त 2026 में जमानत पर बाहर आ चुका है।
सुरक्षा में हुई इस गंभीर लापरवाही को छिपाने और प्रशासनिक विफलता पर पर्दा डालने के लिए जेल प्रशासन ने जल्दबाजी में नासिक रोड पुलिस स्टेशन में केवल वीडियो बनाने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
जेल अधीक्षक अरुणा मुगुटराव के निर्देश पर कर्मचारी अनिल कपिले ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आंतरिक जांच की जिम्मेदारी संभालने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई, इस पर प्रशासन ने मौन साध रखा है।
नासिक रोड जेल का इतिहास देखें तो इससे पहले भी यहां गांजा मिलना, कैदियों का उत्पीड़न और हत्या की सुपारी दिए जाने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। मेफेड्रोन ड्रग्स तस्करी से जुड़े गिरोहों द्वारा इसी जेल के भीतर एमडी बनाने का फॉर्मूला तैयार करने का खुलासा पहले हो चुका है।
नासिक शहर में होने वाले कई आपराधिक घटनाक्रमों के तार सीधे इस जेल से जुड़े पाए गए हैं। गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि संदेहास्पद कैदियों तक मोबाइल, हथकड़ियां और रस्सियां आसानी से कैसे पहुंच जाती हैं। अब देखना यह है कि जेल महानिरीक्षक सुहास वारके इस पूरे तंत्र पर क्या कठोर कार्रवाई करते हैं।
जेल परिसर में गांजा पहुंचना, सुपारी देना और कैदियों के उत्पीड़न का जिम्मेदार कौन है?
कैदियों के साथ मारपीट होने के बाद भी प्रशासन चुप्पी क्यों साधे रहता है?
पुलिस में मामले दर्ज होने के बावजूद जेल प्रशासन को जानकारी क्यों नहीं होती?
कैदियों तक हथकड़ियां, रस्सियां और मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं?
डॉक्टर और जेल अधीक्षक इस गंभीर लापरवाही पर ध्यान क्यों नहीं देते?