Chandrapur Fancy Vehicle Number RTO Revenue: वाहन के नंबर के जरिए भी अपनी अलग पहचान बनाने का नागरिकों का शौक बढ़ता जा रहा है। पसंदीदा, शुभ या खास अंक वाला नंबर हासिल करने के लिए वाहनधारक अतिरिक्त शुल्क देने को भी तैयार हैं।
चंद्रपुर उपप्रादेशिक परिवहन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के आर्थिक वर्ष में पसंदीदा नंबर के लिए 1,816 आवेदन प्राप्त हुए। इनसे आरटीओ को 2 करोड़ 20 लाख 68 हजार रुपए का राजस्व मिला। पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में 66 लाख 21 हजार 500 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2024-25 में पसंदीदा नंबर के लिए 1,510 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनसे 1 करोड़ 54 लाख 46 हजार 500 रुपए का राजस्व मिला था।
इस वर्ष आवेदनों की संख्या में 306 की वृद्धि हुई है। खास बात यह है कि आवेदनों की तुलना में राजस्व में अधिक बढ़ोतरी हुई है। इससे महंगे और आकर्षक नंबरों के लिए वाहनधारकों का बढ़ता रुझान सामने आ रहा है। जन्मतिथि, व्यवसाय, परिवार की महत्वपूर्ण तारीख या खुद के लिए शुभ माने जाने वाले अंक को वाहन के नंबर में शामिल कराने के लिए नागरिक अतिरिक्त शुल्क देने को तैयार हैं। विशेष रूप से नया वाहन खरीदते समय पसंदीदा या फैसी नंबर लेने का चलन बढ़ रहा है। वाहन के प्रकार के अनुसार पसंदीदा नंबर के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है।
नियमों के तहत वाहनधारकों को उपलब्ध नंबरों में से पसंदीदा नंबर चुनने की सुविधा दी जात है। किसी विशेष नंबर की मांग अधिक होने पर शासन द्वारा निर्धारित शुल्क के अनुसा राशि ली जाती है। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण आवेदन करना भी आसान हो गया है। पसंदीदा नंबरों से मिलने वाले राजस्व में एक वर्ष में करीब 42.87 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां 1.54 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2.20 करोड़ रुपए हो गया। इससे फैंसी नंबरों की बढ़ती मांग आरटीओ के राजस्व के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 0007 और 5555 नंबर सबसे महंगे रहे। इन दोनों नंबरों के लिए आरटीओ को प्रत्येक से 2 लाख 10 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा 0009, 0111, 0011, 0005 और 7777 जैसे आकर्षक नंबरों को भी वाहनधारकों की अच्छी-खासी पसंद मिल रही है।
चंद्रपुर प्रादेशिक परिवहन अधिकारी श्याम लोही ने कहा कि पसंदीदा नंबर को लेकर नागरिकों में बढ़ता उत्साह सकारात्मक बात है। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके वाहन को उसकी पसंद या शुभमाने जाने वाला नंबर मिले। शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से नागरिकों को पसंदीदा नंबर उपलब्ध कराए जाते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया से यह सुविधा और आसान हुई है। नागरिकों का बढ़ता प्रतिसाद इस सुविधा पर उनके विश्वास का प्रमाण है।