Chandrapur Belora Bridge: शनिवार तड़के करीब 1:20 बजे सामने आई एक घटना ने बेलोरा पुलिया की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए। साबिर सिद्दीकी से जुड़ी घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और रेस्क्यू टीम ने वर्धा नदी में तलाश अभियान शुरू किया। करीब 15 घंटे तक चले प्रयासों के बाद शनिवार शाम 5 बजे साबिर का शव बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना के बाद परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना से पहले साबिर ने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने दोस्तों से बातचीत की थी। उसने खुद के पुलिया पर होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उसके नदी में छलांग लगाने की आशंका जताई गई। दोस्तों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचा और नदी में तलाश शुरू की। कई घंटे की खोजबीन के बाद शाम करीब 5 बजे शव बरामद किया गया। घटना से पहले हुई वीडियो कॉल अब पूरे मामले की महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान साबिर ने दोस्तों से कहा था, "अब कभी नहीं आऊंगा" इसके बाद संपर्क नहीं होने पर दोस्तों ने आशंका जताते हुए पुलिस को जानकारी दी। पुलिस द्वारा घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। साबिर का शव मिलने की खबर परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रही। जिस समय परिजन उसके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए हुए थे, उसी दौरान उसकी मौत की खबर पहुंची। परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है। एक सदस्य की अचानक मौत से परिवार के सामने भावनात्मक पीड़ा के साथ भविष्य को लेकर भी कई सवाल खड़े हो जाते हैं।
साबिर की घटना के बाद बेलोरा पुलिया की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में इस स्थान पर आधा दर्जन से अधिक लोग नदी में छलांग लगाकर जान गंवा चुके हैं। यदि पूर्व घटनाओं का रिकॉर्ड भी इसी प्रकार का है, तो पुलिया को संवेदनशील स्थल मानकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
साबिर की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे। किसी घटना के बाद केवल रेस्क्यू अभियान चलाने के बजाय संवेदनशील स्थानों पर पहले से सुरक्षा उपाय मजबूत करना ही जनहित की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण होगा।
साबिर की घटना के बाद बेलोरा पुलिया की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों में इस स्थान पर आधा दर्जन से अधिक लोग नदी में छलांग लगाकर जान गंवा चुके हैं। यदि पूर्व घटनाओं का रिकॉर्ड भी इसी प्रकार का है, तो पुलिया को संवेदनशील स्थल मानकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।