Rohit Pawar Vs Sanjay Gaikwad: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग ने हिंसक और उग्र रूप ले लिया है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ द्वारा दी गई कथित विवादित टिप्पणियों के बाद कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन देखा गया। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने गायकवाड़ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
रोहित पवार के अनुसार, दो दिन पहले विधायक संजय गायकवाड़ ने कोल्हापुर के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता कॉमरेड प्रशांत को फोन किया था। यह विवाद महान विचारक और स्वर्गीय गोविंद पानसरे द्वारा लिखित पुस्तक 'शिवाजी कौन था?' (Shivaji Kon Hota) को लेकर शुरू हुआ। रोहित पवार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि "गोविंद पानसरे की यह पुस्तक पिछले 40 वर्षों से छत्रपति शिवाजी महाराज के वास्तविक विचारों को जन-जन तक पहुँचा रही है। इसमें बताया गया है कि कैसे महाराज महिलाओं, किसानों, व्यापारियों और आम जनता का सम्मान करते थे। लेकिन विधायक गायकवाड़ ने इस पुस्तक को छापने वाले कार्यकर्ता प्रशांत को न केवल धमकाया, बल्कि उनकी माता और पत्नी के बारे में ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया जिसे दोहराया भी नहीं जा सकता।"
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि फोन कॉल के दौरान गायकवाड़ ने न केवल व्यक्तिगत गालियां दीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति भी अनादर व्यक्त किया। इसके अलावा, उन्होंने गोविंद पानसरे के बारे में भी बेहद निचले स्तर की टिप्पणी की। गौरतलब है कि गोविंद पानसरे की 2015 में चरमपंथी विचारधारा वाले लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पवार ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसे महापुरुषों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति इस तरह की भाषा का प्रयोग महाराष्ट्र की संस्कृति के खिलाफ है।
इस मामले में सबसे ज्यादा नाराजगी पुलिस की कार्यप्रणाली और सत्ताधारी दल के रवैये को लेकर है। रोहित पवार ने सवाल उठाया कि घटना के 30-40 घंटे बाद, 24 अप्रैल को जाकर FIR दर्ज क्यों की गई? उन्होंने सीधे तौर पर सरकार को घेरते हुए कहा कि "जो पार्टी 'नारी शक्ति' और महिलाओं के सम्मान की बात करती है, उसी के शासनकाल में एक विधायक सरेआम किसी की मां-बहन को गालियां दे रहा है। ऐसे विधायक पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या सत्ता का संरक्षण उन्हें कानून से ऊपर रखता है?"
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रोहित पवार ने अब इस लड़ाई को सड़क पर ले जाने का फैसला किया है। उन्होंने घोषणा की है कि 28 अप्रैल को बुलढाणा में संजय गायकवाड़ के आवास के सामने एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यह प्रदर्शन पूरी तरह वैचारिक और लोकतांत्रिक होगा। प्रदर्शनकारी गायकवाड़ के घर के बाहर बैठकर गोविंद पानसरे की प्रसिद्ध पुस्तक 'शिवाजी कौन था?' का पाठ करेंगे। इसका उद्देश्य विधायक को यह याद दिलाना है कि शिवाजी महाराज के आदर्श क्या थे और महिलाओं का सम्मान कैसे किया जाता है।
कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन पर हुए प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता में इस व्यवहार को लेकर गहरा असंतोष है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन दबाव में आकर संजय गायकवाड़ के खिलाफ कोई कठोर दंडात्मक कदम उठाता है या यह राजनीतिक घमासान और उग्र रूप धारण करेगा। महाराष्ट्र की जनता की नजरें अब 28 अप्रैल के आंदोलन पर टिकी हैं।