सब्जियां (सोर्स: सोशल मीडिया) 
भंडारा

सब्जी के दामों ने तोड़े रिकॉर्ड, 60 से 80 रुपये किलो मिल रही सब्जियां, लोग हो रहे परेशान

Vegetable Price Hike: सर्दियों में सस्ती रहने वाली सब्जियां इस साल महंगाई की भेंट चढ़ गईं। बेमौसम बारिश और देर से बुवाई के कारण आवक घटी, दाम चार गुना तक बढ़े। आम परिवारों का रसोई बजट बिगड़ गया।

आकाश मसने

Vegetable Prices Today: हर साल, सर्दी का मौसम बाजारों में सस्ती दरों के लिए जाना जाता है। इन 'फसल के दिनों' में सब्जियों की भारी आवक बढ़ने से कीमतें गिर जाती हैं। हालांकि, यह साल अपवाद साबित हुआ है। बेमौसम बारिश और खरीफ सीजन की लंबी अवधि के कारण सब्जियों के उत्पादन को भारी झटका लगा है। आवक में कमी आने से दामों ने रिकॉर्ड ऊंचाई छू ली है। फसल के दिनों में भी बाजार गरमाया हुआ है, जिससे आम नागरिकों को महंगाई की तीव्र मार झेलनी पड़ रही है।

इस सीजन में सब्जी बाजार में महंगाई ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। पिछले साल की कीमतों की तुलना में, कई सब्जियों के दामों में चौगुनी (चार गुना) तक वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, खुदरा बाजार में अधिकांश सब्जियों की कीमतें 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई हैं, जिससे ग्राहकों को तीव्र आर्थिक तनाव महसूस हो रहा है।

बेमौसम बारिश ने बिगाड़ा खेल

खरीफ सीजन के अंतिम चरण में कई जगहों पर बेमौसम बारिश हुई। इसका सीधा असर पत्तेदार सब्जियों और टमाटर, मिर्च जैसी कोमल फसलों पर पड़ा। खड़ी फसलें नष्ट हो गईं। पानी जमा होने से कटाई के लिए तैयार माल सड़ गया। इससे बाजार में अपेक्षित आवक बहुत कम हो गई। इस साल रबी की बुवाई की अवधि लंबी खिंचने के कारण कई किसानों ने सर्दियों की सब्जियों की बुवाई देरी से की। बाजार में आवक सही समय पर शुरू होनी चाहिए थी, जो लगभग 15 से 20 दिन देर से शुरू हुई है। इससे मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया।

पिछले साल और वर्तमान में सब्जियों के दाम में अंतर

सब्जी पिछले साल का खुदरा दाम वर्तमान खुदरा दाम
टमाटर 10-15 रुपए प्रति किलो 40-50 रुपए प्रति किलो
बैंगन 10-20 रुपए प्रति किलो 40-60 रुपए प्रति किलो
पत्तागोभी (कोबी) 20-30 रुपए प्रति किलो 50-60 रुपए प्रति किलो
मेथी / पत्तेदार सब्जी 15-20 रुपए प्रति गड्डी 30-40 रुपए प्रति गड्डी

सामान्य परिवारों का बजट बिगड़ा

बढ़ती महंगाई का सबसे बड़ा असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के दैनिक खर्च पर पड़ा है। सब्जियों के दाम पहुंच से बाहर होने के कारण गृहणियों को रसोई के मेन्यू में बदलाव करने पड़ रहे हैं। कम कीमत वाली और टिकाऊ सब्जियों पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इस तीव्र आर्थिक तनाव के कारण नागरिकों में तीव्र असंतोष देखा जा रहा है।

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