Koka Wildlife Sanctuary: कोका वन्यजीव अभयारण्य के बफर क्षेत्र में बोंडे स्थित वन भूमि पर किए गए बड़े पैमाने के अतिक्रमण को वन विभाग ने एक कार्रवाई के तहत हटा दिया है। कोका बफर सहवनक्षेत्र के तहत आने वाले पालोरा बफर नियतक्षेत्र के बोंडे में गट क्रमांक 81/1, 65/1 और 66/1 की सरकारी वन भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर रखा था। इस जमीन पर अपना कानूनी अधिकार जताने के लिए संबंधित लोगों ने वन अधिकार दावे भी प्रस्तुत किए थे।
हालांकि, इन दावों में जमा किए गए दस्तावेज अधूरे और नियमों के विपरीत पाए जाने के कारण भंडारा के जिलाधिकारी सावन कुमार ने इन सभी दावों को अपात्र घोषित कर दिया था। नोटिस की अनदेखीदावे खारिज होने के बाद वन विभाग ने संबंधित अतिक्रमणकारियों को बारबार नोटिस जारी कर स्वेच्छा से और अपने खर्च पर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे।
नोटिसों के बावजूद जब अतिक्रमणकारियों ने जगह खाली नहीं की, तो वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए बल प्रयोग कर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया। कार्रवाई से पहले नवेगांवनागझिरा व्याघ्र आरक्षित क्षेत्र, गोंदिया के रेंजर ने संबंधित विवादित भूमि की सटीक पैमाइश की। इस गिनती में सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण का दायरा पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद बुलडोजर चलाकर कब्जा हटा दिया गया। यह कार्रवाई उपवनसंरक्षक तथा क्षेत्र संचालक नवेगावनागझिरा बाघ आरक्षित क्षेत्र, गोंदिया, उपसंचालक और सहायक वनसंरक्षक कोका वन्यजीव अभयारण्य, साकोली के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कोका अभयारण्य के वनपरिक्षेत्र अधिकारी, साकोली गश्ती दल, कोका व चंद्रपुर कोर क्षेत्र के कर्मचारी और गोंदिया के वनरक्षक बड़ी संख्या में तैनात थे।
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अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे गोखलेकोका वन्यजीव अभयारण्य के वनपरिक्षेत्र अधिकारी सूरजकुमार गोखले ने बताया कि सरकारी वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।वन संपदा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग आगे भी ऐसी कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी रखेगा। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से वन भूमि पर नजर गड़ाए बैठे भूमाफियाओं और अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।