धान खरीदी भुगतान (सोर्सः सोशल मीडिया)
भंडारा

Bhandara News: धान खरीदी के 281.41 करोड़ रुपये 11 दिन से अटके, किसानों को अब तक नहीं मिला भुगतान

Paddy Procurement Payment Delay: धान खरीदी के 281.41 करोड़ रुपये जिला मार्केटिंग फेडरेशन के खाते में जमा होने के 11 दिन बाद भी किसानों को भुगतान नहीं मिला। किसान संघ ने जांच की मांग की।

आंचल लोखंडे

Marketing Federation Bhandara: सरकार की ओर से किसानों की धान खरीदी के 281 करोड़ 41 लाख रुपये जिला पणन महासंघ (मार्केटिंग फेडरेशन) के बैंक खाते में जमा हुए 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी रुपया किसानों के खातों में ट्रांसफर नहीं किया गया है। यह भारी-भरकम राशि महासंघ के बैंक खाते में बेवजह पड़ी हुई है। किसान संघ ने आरोप लगाया है कि डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) में बदलाव और अधिकारी के तबादले का बहाना महज एक नौटंकी है, जिसका असली मकसद बैंक में पड़ी इस बड़ी रकम पर मिलने वाले ब्याज का फायदा उठाना है।

पणन महासंघ के अधिकारियों का तबादला होने के बावजूद नियमानुसार उपलब्ध पुरानी डीएससी का उपयोग कर किसानों का भुगतान आसानी से किया जा सकता था। कहा जा रहा है कि पैसे रोककर रखने और समय बिताने के लिए ही डीएससी चेंज करनी है का नया बहाना गढ़ा गया है। किसानों के मुताबिक यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सरकार से फंड मिलने पर साहब छुट्टी पर हैं या साहब मुंबई गए हैं जैसे कारण बताकर 4 से 5 दिनों तक भुगतान अटकाया जाता था। किसानों का कहना है कि यदि जिले के पालक मंत्री महासंघ के पिछले कुछ महीनों के बैंक स्टेटमेंट की जांच कराएं, तो यह पुराना गोलमाल खुलकर सामने आ जाएगा।

डीएससी और तबादले का दिया जा रहा हवाला

किसानों के 281 करोड़ 41 लाख रुपये पिछले सप्ताह शुक्रवार को ही महासंघ के खाते में जमा हो गए थे। जानबूझकर शुरुआत के दो दिन पैसे नहीं डाले गए और फिर पूरे सप्ताह तरह-तरह के बहानों का दौर चलता रहा। इतनी बड़ी रकम 11 दिनों तक बैंक में पड़े रहने से लाखों रुपये का ब्याज बनता है। अब किसान गुस्से में सवाल उठा रहे हैं कि लाखों रुपये के इस ब्याज का खेल किसकी जेब भरने के लिए खेला जा रहा है?

अधिकारी का तबादला होने से आई समस्या

भंडारा जिला मार्केटिंग अधिकारी संभाजी चंदे ने कहा कि जिला मार्केटिंग अधिकारी का तबादला होने और कुछ तकनीकी कारणों की वजह से किसानों की धान खरीदी की बकाया राशि जमा होने में देरी हुई है। कल या परसों तक यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी।

ढाई महीने बीतने के बाद भी जमा नहीं

लाखांदूर तहसील के आधारभूत धान खरीदी केंद्र अध्यक्ष मुकेश भैया ने कहा कि जून महीने में धान खरीदी की सीमा समाप्त हो गई थी, जिसके बाद 12 जून के आसपास डीएमओ कार्यालय से अनुमति मिली। नियमानुसार 15 जुलाई को आधारभूत केंद्र की ओर से हुडी भेज दी गई थी। ढाई महीने बीत जाने के बाद भी किसानों के खातों में रकम जमा नहीं हुई है, जिसके चलते किसान अब लगातार आधारभूत केंद्र संचालकों के पास आकर तगादा कर रहे हैं।

ब्याज सहित प्रदान की जाने वाली राशि

किसान संघ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मांग की है कि इस जानबूझकर की गई देरी के कारण 11 दिनों में बैंक खाते में जितना भी ब्याज बना है, वह पूरा पैसा संबंधित किसानों के खातों में बांटा जाए। साथ ही, सरकारी फंड के क्रेडिट और डेबिट होने की तारीखों की गहन जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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