भंडारा

भंडारा: 102 करोड़ की वैनगंगा जलपर्यटन परियोजना अधर में; तकनीकी अड़चनों और विवादों के कारण 5 महीने से काम बंद

वैनगंगा नदी जलपर्यटन परियोजना तकनीकी अड़चनों के कारण अटकी, स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ी।

रूपम सिंह

Bhandara Tourism News: भंडारा जिले को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई वैनगंगा नदी पर प्रस्तावित जलपर्यटन परियोजना इन दिनों विवादों में घिर गई है। जून 2024 में धूमधाम से भूमिपूजन के बाद शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भंडारा क्षेत्र में काम पिछले 5 महीनों से पूरी तरह ठप पड़ा है। बताया गया है कि गोसीखुर्द धरण के बुडीत क्षेत्र में जलसंपदा विभाग की विधिवत अनुमति लिए बिना कार्य शुरू कर दिया गया था। इसी कारण नागपुर स्थित गोसीखुर्द प्रकल्प मंडल के अधीक्षक अभियंता ने नवंबर में कार्य पर रोक लगा दी।

जनप्रतिनिधियों की पहल, लेकिन परियोजना अधर में। भंडारा के विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने इस परियोजना के लिए विशेष पहल की थी, जिसके चलते राज्य सरकार ने करीब 102 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। शुरुआती दौर में कार्य तेजी से चला, लेकिन बाद में तकनीकी अड़चनों के कारण रुक गया। इस परियोजना से जिले में पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी।

पर्यटकों के लिए बहुआयामी योजनाएं। परियोजना के तहत भंडारा, मौदी और गोसी क्षेत्रों में भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने थे। साथ ही पर्यटकों के लिए कृत्रिम स्विमिंग पूल, आधुनिक जलतरण सुविधाएं, बोटिंग, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, रेस्टोरेंट, कॉन्फ्रेंस हॉल और कर्मचारियों के लिए आवास की योजना थी। नदी किनारे आकर्षक व्यू पॉइंट विकसित कर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने की भी व्यवस्था प्रस्तावित थी।

निधि के दुरुपयोग के आरोप। परियोजना को लेकर उस समय विवाद बढ़ा, जब यह आरोप लगा कि नगर परिषद भंडारा के अधिकार क्षेत्र से बाहर की जमीन पर काम किया जा रहा है। साथ ही दलित बस्ती सुधार योजना के निधि को नियमों के विरुद्ध पर्यटन व सौंदर्यीकरण कार्यों में खर्च करने के आरोप भी सामने आए। इस मामले को लेकर विधायक परिणय फुके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ध्यान आकर्षित किया, जिसके बाद कार्य रोकने के निर्देश जारी किए गए।

टूरिज्म सर्किट का सपना अधूरा। वर्तमान में ऑफिसर्स क्लब के पीछे और कारधा पुल के पास चल रहे कार्य पूरी तरह बंद हैं, जबकि मौदी क्षेत्र में काम धीमी गति से जारी है। इस परियोजना के पूरा होने पर भंडारा और नागपुर को जोड़ने वाला बड़ा पर्यटन सर्किट विकसित होने की संभावना थी, लेकिन प्रशासनिक उलझनों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के चलते यह सपना अधर में लटक गया है।

स्थानीयों में नाराजगी। लंबे समय से काम बंद रहने के कारण स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। इस परियोजना से रोजगार, होटल व्यवसाय और स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई है।

102 करोड़ रु. लागत, 5 महीने से काम बंद

संभावित लाभ: पर्यटन को बढ़ावा, रोजगार के अवसर, होटल व स्थानीय व्यवसाय को लाभ, भंडारा-नागपुर टूरिज्म सर्किट का विकास।

प्रस्तावित सुविधाएं: बोटिंग सुविधाएं, आधुनिक स्विमिंग पूल, व्यू पॉइंट, रेस्टोरेंट व कॉन्फ्रेंस हॉल, बैठने की व्यवस्था, कर्मचारियों के लिए आवास।

रुकावट के कारण: गोसीखुर्द धरण क्षेत्र में बिना अनुमति काम, जलसंपदा विभाग की मंजूरी नहीं, नवंबर में कार्य पर रोक, प्रशासनिक व तकनीकी अड़चनें।

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