Sangadi PM Shri School: भंडारा जिले के साकोली तहसील के सानगड़ी स्थित पीएमश्री जिला परिषद हाईस्कूल एवं कनिष्ठ महाविद्यालय में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के सामने विषय शिक्षकों की कमी का संकट खड़ा हो गया है। विज्ञान और कला शाखा के महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रभावित होने से नाराज करीब 50 से 60 विद्यार्थी गुरुवार को बस से जिला परिषद कार्यालय भंडारा पहुंचे।
विद्यार्थियों ने शिक्षा सभापति के कक्ष में पहुंचकर विषय शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग की। इसके बाद उन्होंने मुख्य कार्यकारी अधिकारी से भी मुलाकात की। विद्यार्थियों के आक्रामक रुख के बाद सोमवार तक विषय शिक्षक उपलब्ध कराने का मौखिक आश्वासन दिए है। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए गए तो वे अभिभावकों के साथ मिलकर स्कूल में ताला लगाने का आंदोलन करेंगे।
बस से जिला परिषद कार्यालय पहुंचे और शिक्षा सभापति के कक्ष में अपनी समस्या रखी। विद्यार्थियों ने बताया कि 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए आवश्यक विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण पाठ्यक्रम पिछड़ रहा है। इससे परीक्षा की तैयारी भी प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि विषय शिक्षक नहीं होंगे तो पढ़ाई कैसे होगी, परीक्षा की तैयारी कैसे की जाएगी और समय पर पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा। विद्यार्थियों की शिकायत के बाद शिक्षा सभापति, शिक्षा अधिकारी तथा जिला परिषद के अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी से चर्चा की।
विद्यार्थियों की नाराजगी को देखते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से सोमवार तक शिक्षक उपलब्ध कराने का मौखिक आश्वासन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। विद्यार्थियों ने इस आश्वासन की लिखित गारंटी देने की मांग की, लेकिन इस पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने की बात कही जा रही है। ऐसे में विद्यार्थी अब सोमवार का इंतजार कर रहे हैं। 2012 से सेवानिवृत्त शिक्षकों के पद रिक्त अभिभावकों का आरोप है कि सानगड़ी स्थित जिला परिषद स्कूल में वर्ष 2012 से सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों के स्थान पर नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है।
अध्यापन व्यवस्था सुचारु रखने के लिए पहले 12 घंटी आधारित शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही थी। इससे विद्यार्थियों को आवश्यक विषयों का अध्यापन मिल रहा था। हालांकि घंटी आधारित शिक्षकों की व्यवस्था कम किए जाने के बाद अध्यापन प्रभावित हुआ है। शिक्षकों की कमी के कारण कई विद्यार्थियों की स्कूल में उपस्थिति भी कम हुई है और कुछ विद्यार्थी घर पर ही रहने लगे हैं। नियमित अध्यापन व्यवस्था नहीं होने पर स्कूल में उपस्थित रहने के बावजूद विद्यार्थियों को अपेक्षित शैक्षणिक लाभ कैसे मिलेगा, यह सवाल अब अभिभावकों और विद्यार्थियों की ओर से उठाया जा रहा है।