

Nagpur Hope Hospital: टेकानाका परिसर में स्थित होप अस्पताल में उपचार के दौरान हुई मरीज की मौत के बाद डॉक्टर और अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाकर बदनाम करने और लाइसेंस रद्द करवाने की धमकी देकर 12 लाख रुपए की फिरौती मांगने के मामले में पांचपावली पुलिस ने शिवसेना शिंदे गुट के युवा सेना जिला प्रमुख शरद सरोदे (45), महिला प्रमुख मनीषा पापड़कर (40), उप जिला प्रमुख पंकज खिंची (40), मुल्ला सिंह गौर, प्रतीक बहुगुणा (40), महेश ढोले (40) और शुभम साठे (25) के खिलाफ विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
होप अस्पताल और रामदासपेठ स्थित आयुष्मान अस्पताल के संचालक डॉ. मुरली बालसुंदरम कसियामल की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। डॉ. मुरली टेकानाका में होप अस्पताल और रामदासपेठ में आयुष्मान अस्पताल चलाते हैं। होप अस्पताल में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मरीजों का इलाज किया जाता है। विगत 30 अगस्त को वर्धा निवासी विठ्ठल तुकाराम साठे नामक मरीज को उपचार के लिए आयुष्मान अस्पताल लाया गया। परिजनों ने उपचार के लिए पैसा नहीं होने की बात कही जिसके बाद साठे को होप अस्पताल भेजा गया। उनका गैंगरीन का इंफेक्शन पूरे शरीर में फैल चुका था।
प्रारंभिक जांच और बाहर से मिलने वाली दवाओं के लिए उनसे 30,000 रुपए लिए गए। डॉक्टर ने परिजनों को पहले ही बताया था कि इंफेक्शन फैलने के कारण साठे के पैर काटने पड़ेंगे लेकिन परिजनों ने इसकी अनुमति नहीं दी। उपचार के दौरान 5 सितंबर को साठे की मौत हो गई। डॉक्टर ने साठे के परिजनों को शव ले जाने को कहा तो उन्होंने इनकार कर दिया। इसके बाद साठे के परिजन और शिंदे गुट की युवा सेना के पदाधिकारी कुछ मीडियाकर्मियों को लेकर अस्पताल पहुंचे।
हंगामा होने पर प्रबंधन द्वारा कंट्रोल रूम को जानकारी दी गई जिसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इसी दौरान शरद सरोदे ने डॉ. मुरली को धमकाया। अस्पताल की बदनामी करने और लाइसेंस रद्द करवाने की धमकी देकर अपने लिए 10 लाख और मरीज के परिजनों के लिए 2 लाख रुपए की मांग की। ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ डॉक्टर ने मामले की शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने फिरौती वसूली सहित विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ की है।
इस प्रकरण को लेकर लगे आरोपों के कारण सीपी विश्वास नांगरे पाटिल ने पांचपावली के थानेदार अनिरुद्ध पुरी को निलंबित कर दिया है। घटना के 2-3 दिन बाद ही डॉ. मुरली ने शरद सरोदे द्वारा ब्लैकमेल कर फिरौती मांगने की शिकायत की थी लेकिन लिखित शिकायत या खुद फरियाद दर्ज कराने के लिए होप अस्पताल की ओर से कोई पुलिस थाने नहीं गया। इस वजह से यह मामला प्रलंबित था।
बुधवार को सीपी ने शहर के डॉक्टरों के साथ बैठक की जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। इस दौरान पीआई पुरी पर एफआईआर दर्ज नहीं करने का भी आरोप लगाया गया जिसके बाद आनन-फानन में सीपी ने पुरी को सस्पेंड करने के आदेश दे दिए। वैसे विभाग के ही अधिकारियों का कहना है कि कई बार खुद मुरली या उनके वकील को शिकायत देने के लिए थाने में उपस्थित होने को कहा गया था लेकिन उनकी ओर से बुधवार को अधिकृत तरीके से शिकायत दर्ज करवाई गई। पुरी के निलंबन से शहर के अधिकारियों में भी नाराजगी है।