भंडारा पुलिस आवास परियोजना (सोर्सः सोशल मीडिया)
भंडारा

भंडारा में पुलिस कर्मियों को मिलेंगे नए आवास, 122 फ्लैट वाली सात मंजिला इमारत तैयार

New Houses For Police Personnel: भंडारा में जर्जर पुलिस कॉलोनियों की जगह 122 नए सरकारी आवास बनाए जा रहे हैं। तुमसर और साकोली में भी पुलिस आवास परियोजनाओं को गति मिली है।

आंचल लोखंडे

Bhandara Police Housing Project: भंडारा जिला मुख्यालय की पुरानी पुलिस कॉलोनियां जर्जर होने से पुलिस परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छतों से पानी टपकने, दीवारों में सीलन व दरारें, खराब शौचालय, टूटी जलापूर्ति पाइपलाइन और जलनिकासी जैसी समस्याएं हैं। दो खतरनाक चॉलों को गिराए जाने के बाद सरकारी आवासों की कमी और बढ़ गई है।

अब इनकी जगह आधुनिक और सुविधायुक्त आवास बनाने का काम शुरू किया गया है। जिला मुख्यालय के साथ तुमसर और साकोली में भी पुलिस आवास परियोजनाओं को गति मिली है।

जिला मुख्यालय में 122 आवास जर्जर

जिला मुख्यालय में पहले तीन पुलिस कॉलोनियों में 206 आवास थे। इनमें से दो चॉलों के 122 आवास जर्जर और खतरनाक होने के कारण गिरा दिए गए। वर्तमान में तीसरी चॉल में 42 आवास शेष हैं, लेकिन उनकी स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।

400 परिवार किराए के मकानों में

पर्याप्त सरकारी आवास नहीं होने से जिला मुख्यालय के करीब 400 पुलिस परिवार निजी मकानों में किराए पर रह रहे हैं। किराए के साथ बच्चों की शिक्षा, आवागमन और अन्य खर्चों का आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। पुलिस कर्मियों की ड्यूटी को देखते हुए कार्यस्थल के आसपास सरकारी आवास उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है।

सात मंजिला इमारत में 122 आवास

जिला मुख्यालय में जर्जर चॉलों की जगह सात मंजिला इमारत बनाई जा रही है। इसमें 10 पुलिस अधिकारियों और 112 पुलिस कर्मचारियों के लिए कुल 122 आवास होंगे। परियोजना का काम अंतिम चरण में है। इससे असुरक्षित आवासों में रहने वाले पुलिस परिवारों को सुरक्षित और सुविधायुक्त आवास मिल सकेगा।

कारधा में कॉलोनी का निर्माण पूरा

कारधा पुलिस थाना क्षेत्र में नई पुलिस कॉलोनी का निर्माण पूरा हो चुका है और अधिकारी-कर्मचारी वहां रहने भी लगे हैं। तुमसर और साकोली में भी पुलिस आवास परियोजनाओं का काम शुरू है। जिले में करीब 1,600 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें लगभग 600 जिला मुख्यालय में और करीब 1,000 अधिकारी-कर्मचारी सात तहसीलों के विभिन्न पुलिस थानों में कार्यरत हैं। वहीं लाखनी, लाखांदुर, पवनी और मोहाड़ी की पुलिस कॉलोनियों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। यहां कहीं मरम्मत तो कहीं पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।

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