प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
भंडारा

सामाजिक बराबरी योजना दम तोड़ती, भंडारा में अंतरजातीय विवाह योजना ठप, जोड़े प्रोत्साहन राशि से वंचित

Bhandara Social Equality: भंडारा जिले में अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 76 पात्र जोड़ों को अब तक 50 हजार की सहायता नहीं मिली है। बजट कमी और प्रशासनिक लापरवाही से वे परेशान हैं।

अंकिता पटेल

Bhandara Intercaste Marriage: भंडारा सामाजिक समानता को बढ़ावा देने और जातिगत भेदभाव की दीवारों को ढहाने के उद्देश्य से सरकार की ओर से शुरू की गई अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना भंडारा जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है।

जिले में कई युवाओं ने सामाजिक और पारिवारिक बाधाओं को पार कर अंतर्जातीय विवाह का साहस तो दिखाया, लेकिन अब उन्हें सरकार की ओर से घोषित प्रोत्साहन राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

प्रशासनिक लेती लतीफी और बजट की कमी के कारण इस समय जिले के 76 पात्र जोड़े सरकारी सहायता से वंचित हैं, जिससे उनके नए जीवन की शुरुआत में आर्थिक मुश्किले आ खड़ी हुई हैं। सामाजिक सदभावना बनाए रखने के लिए राज्य सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज में एकता स्थापित करना और जाति प्रथा को कमजोर करना है।

योजना के प्रावधानों के अनुसार, यदि वधु या वर में से कोई एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़े वर्ग से संबंधित है और दूसरा पक्ष सवर्ण या भिन्न वर्ग से है, तो उस जोड़े को शासन की ओर से 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। यह राशि नवविवाहित जोड़ों को अपना नया संसार बसाने और शुरुआती आर्थिक बोझ को कम करने में एक बड़ा संबल प्रदान करती है।

सरकारी दफ्तरों की चौखट पर संघर्ष

जिले में ऐसे कई जोड़े है जिन्होंने समाज के कड़े विरोध और अपने परिवारों की नाराजगी मोल लेकर प्रेम विवाह किया है। ऐसे जोड़ों के लिए सरकारी प्रोत्साहन राशि केवल एक सहायता नहीं बल्कि सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक होती है। कई मामलों में परिवार का सहयोग न मिलने के कारण इन जोड़ों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जब सलकार की ओर से मिलने वाली मदद में भी देरी होती है, तो उनकी स्थिति और भी विकट हो जाती है, पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें एक ही दस्तावेज के लिए कई बार समाज कल्याण विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

सरकार को भेजा मांग पत्र

प्रशासन की मंशा किसी को परेशान करने की नहीं है, विभाग को जैसे-जैसे बजट प्राप्त हुआ, पात्र लाभार्थियों को तत्काल लाभान्वित किया गया है। वर्तमान में लंबित 76 मामलों के निस्तारण के लिए राज्य सरकार को अतिरिक्त बजट का मांग पत्र भेजा जा चुका है।

जैसे ही शासन से अगली किस्त प्राप्त होगी, रुकी हुई राशि सीधे संबंधित जोड़ों के बैंवा खातों में आरटीजीएस के माध्यम से जमा कर दी जाएगी। तब तक विभाग त्रुटिपूर्ण आवेदनों को दुरुस्त करने का काम कर रहा है ताकि फड़ आते ही भुगतान में देरी न हो।

-भंडारा सहायक आयुक्त सामाजिक न्याय विभाग, आशा कवाडे

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