वैनगंगा नदी जलसमाधि आंदोलन (सोर्सः सोशल मीडिया)
भंडारा

भंडारा में 59 सफाई कर्मचारियों को काम से हटाने पर हंगामा, नौकरी बहाली के लिए वैनगंगा नदी में जलसमाधि आंदोलन

Wainganga River Protest: भंडारा नगर परिषद के करीब 59 ठेका सफाई कर्मचारियों को मजदूरी बढ़ाने की मांग के बाद काम से हटाए जाने का मामला सामने आया है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • भंडारा नगर परिषद के स्वच्छता विभाग में कार्यरत करीब 59 ठेका कर्मचारियों को मजदूरी बढ़ाने की मांग के बाद काम से हटा दिया गया।

  • नौकरी पर दोबारा रखने और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को अस्मिता का एल्गार संगठन के संस्थापक परमानंद मेश्राम के नेतृत्व में आंदोलन किया गया।

  • संगठन के अनुसार, कुछ कर्मचारी पिछले 18 से 20 वर्षों से शहर में कचरा संकलन, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

Bhandara Sanitation Workers Protest: मजदूरी में वृद्धि की मांग करने पर भंडारा नगर परिषद के स्वच्छता विभाग के करीब 59 ठेका सफाई कर्मचारियों को काम से हटा दिया गया।

इन कर्मचारियों को तत्काल दोबारा काम पर रखने, मजदूरी बढ़ाने और ठेकेदारों की नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर सोमबार को संगठन के संस्थापक परमानंद मेश्राम के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने वैनगंगा नदी में जलसमाधि आंदोलन किया।

कई वर्षों से संभाल रहे जिम्मेदारी

अस्मिता का एल्गार संगठन के ज्ञापन के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों में से कुछ पिछले 18 से 20 वर्षों से शहर की सफाई का काम कर रहे हैं। कचरा संकलन, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छता जैसे स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण कार्य करने के बावजूद उन्हें बेहद कम मजदूरी दी जा रही थी।

मौदा से नए कर्मचारियों को लाए जाने का दावा

मजदूरी बढ़ाने की मांग के बाद संबंधित ठेकेदार ने काम करने में असमर्थता जताते हुए पत्र दिया। इसके बाद नगर परिषद प्रशासन ने नया ठेकेदार नियुक्त कर दिया। पूर्व ठेकेदार अब भी सफाई वाहनों के डीजल का भुगतान कर रहा है। वहीं, स्थानीय कर्मचारियों को हटाकर मौदा से नए कर्मचारियों को लाए जाने का दावा भी किया गया है।

कर्मचारियों को हटाने का निर्णय किसने लिया

संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि पूर्व ठेकेदार को किस तारीख को कार्यमुक्त किया गया, नए ठेकेदार की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई और कर्मचारियों को हटाने का निर्णय किसने लिया, इसकी नगर परिषद से बाहर के वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से स्वतंत्र जांच कराई जाए।

इस दौरान सचिन गेडाम, दिलीप वानखेडे, राधेश्याम कावले, राहुल श्यामकुवर, अजित गजभिये, राजकुमार साकोरे, राजू गोन्नाडे, अमित नान्हे, राजेश भुरे, अंकित कातोरे, विलास शिवणकर, ज्ञानेश्वर वाघाडे, जितेंद्र, सहित संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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