Bhandara OBC Census Protest: ओबीसी का कॉलम नहीं, तो जनगणना नहीं के नारे के साथ तुमसर तहसील के खापा गांव में जनगणना प्रक्रिया का पहले ही दिन पुरजोर विरोध किया गया। जिले में आज से आधिकारिक तौर पर गृहगणना हाउस लिस्टिंग की शुरुआत तो हुई, लेकिन खापा में स्थानीय नागरिकों के तीखे आक्रोश के चलते इस अभियान को करारा झटका लगा है। वर्ष 202627 की इस राष्ट्रीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए अलग से कोई कॉलम न होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रक्रिया पर पूरी तरह बहिष्कार का ऐलान कर दिया।
गांव में पहुंचे गणना कर्मियों को ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में अपना फैसला सुनाया और उन्हें बैरंग वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक जनगणना फॉर्म में ओबीसी के लिए स्वतंत्र कॉलम शामिल नहीं किया जाता, तब तक खापा गांव में किसी भी प्रकार की गणना नहीं होने दी जाएगी।
ओबीसी सेल के जिलाध्यक्ष राजकुमार माटे ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि देश और राज्य में ओबीसी समाज की एक बहुत बड़ी आबादी होने के बावजूद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। जब तक जाति आधारित जनगणना नहीं होती और उसमें ओबीसी के लिए अलग कॉलम नहीं दिया जाता, तब तक इस वर्ग की वास्तविक स्थिति और सटीक जनसंख्या का मूल्यांकन असंभव है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से ओबीसी समाज की इस जायज मांग की लगातार अनदेखी करने के कारण ही अब ग्रामीण इलाकों में यह गुस्सा जनआंदोलन का रूप ले रहा है। खापा गांव से शुरू हुई विरोध की यह चिंगारी अब पूरे जिले और राज्य में फैलेगी। जनगणना का विरोध करने के इस फैसले को पूरे खापा गांव का एकतरफा समर्थन मिला है। जैसे ही जनगणना कर्मचारी गांव की सीमा में दाखिल हुए, ग्राम पंचायत के सभी वर्तमान व पूर्व पदाधिकारी, कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में एकजुट हो गए।
उन्होंने कर्मचारियों को गांव में किसी भी तरह की एंट्री या पंजीकरण करने से साफ रोक दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से ओबीसी समाज की अलग से गिनती करना उनकी न्यायसंगत मांग है। सामान्य वर्ग और अनुसूचित जातिजनजाति की अलग से एंट्री करके ओबीसी को केवल अन्य की श्रेणी में धकेलना इस बड़े समाज के साथ सरासर अन्याय है।
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गृहगणना के पहले ही दिन हुए इस तीखे विरोध ने प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है और अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को शांत कराने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे। ग्रामीणों ने दो टूक लहजे में कहा कि पहले ओबीसी का कॉलम लाओ, उसके बाद ही जनगणना का बहीखाता खोलो। खापा गांव के इस कड़े रुख के बाद तुमसर तहसील के अन्य गांवों में भी इस आंदोलन के पैर पसारने के आसार दिख रहे हैं।
एक तरफ जहां सरकार इस बार डिजिटल और हाईटेक तरीके से जनगणना कराने के बड़ेबड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आबादी के एक बहुत बड़े हिस्से को अपनी स्वतंत्र पहचान दर्ज करने का हक न मिलने से यह विवाद अब और ज्यादा गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य ओबीसी बहुल गांवों में भी इसी तरह के विरोध की आशंका है, जिससे पूरी जनगणना प्रक्रिया पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं।