मृतक संतोष देशमुख और आरोपी वाल्मिक कराड (सोर्स: सोशल मीडिया) 
बीड

संतोष देशमुख हत्याकांड: धनंजय मुंडे के करीबी कराड समेत 4 आरोपियों को कोर्ट से झटका, MCOCA बरकरार

Santosh Deshmukh Murder Case: बीड सरपंच संतोष देशमुख हत्या मामले में विशेष अदालत ने चार आरोपियों को बरी करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि आरोपी संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े हैं।

आकाश मसने

Beed Sarpanch Santosh Deshmukh Murder Case: महाराष्ट्र के बीड की एक विशेष अदालत ने सरपंच संतोष देशमुख की हत्या के मामले में 11 नवंबर को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। मकोका न्यायाधीश वीएच पटवाडकर ने चार आरोपियों को उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार बताते हुए आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया है।

यह मामला बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की निर्मम हत्या से जुड़ा है, जिनका पिछले साल 9 दिसंबर को अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड भी शामिल है, जो महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता धनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी हैं।

आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका), अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी एक संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य प्रतीत होते हैं और वे लगातार गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

2 करोड़ की फिरौती और काम बंद करने की धमकी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुख्य आरोपी कराड और अन्य आरोपियों ने निजी फर्म अवाडा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से दो करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि आरोपियों ने फिरौती नहीं देने पर कंपनी का काम बंद कराने की कथित तौर पर धमकी दी थी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि आरोपियों ने कथित तौर पर साजिश रची, अपहरण किया और जब सरपंच संतोष देशमुख ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो उन्होंने उन पर जानलेवा हमला किया। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपियों ने देशमुख के शव को दैथाना फाटा में फेंक दिया और भाग गए थे।

उज्ज्वल निकम ने दिया ये तर्क

मामले में चार आरोपियों प्रतीक घुले, सुधीर सांगले, महेश केदार और जयराम चाटे ने बरी किए जाने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि वे निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक मंशा के कारण झूठे मामले में फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ मकोका के तहत कोई मामला नहीं बनता।

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत में जोरदार तर्क पेश किए। निकम ने कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं को बरी कर दिया गया तो वे समान या बड़े अपराध दोहराएंगे। उन्होंने ने अदालत से कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने फैसला सुनाया कि गवाहों के बयान और अन्य प्रासंगिक दस्तावेज प्रथम दृष्टया, उक्त अपराधों में अभियुक्तों की संलिप्तता दर्शाते हैं। इसी आधार पर अभियुक्तों को बरी किए जाने के योग्य नहीं माना गया।

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