Chhatrapati Sambhajinagar Zilla Parishad Solar Power Project: छत्रपति संभाजीनगर तमाम बाधाओं को पार करते हुए जिला परिषद की बहुप्रतीक्षित नई प्रशासनिक इमारत का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। परियोजना में बिजली कनेक्शन की समस्या अवरोध बनी हुई थी। महावितरण ने सबस्टेशन निर्माण के लिए 6 गुंठा जमीन अथवा साढ़े तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। जिला परिषद पदाधिकारियों ने आखिरकार महावितरण को यह पूरी जमीन देने का निर्णय लिया है।
यही नहीं, पूरी इमारत को सौर ऊर्जा पर संचालित करने की योजना भी बनाई गई है, ताकि भविष्य में लाखों रुपये के बिजली बिल का भार कम हो सके। जिला परिषद अध्यक्ष अविनाश गलांडे, वित्त व निर्माण कार्य सभापति सचिन गरड व महावितरण अधिकारियों के बीच हुई अहम बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई।
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आधारशीला रखने के बाद करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से यह आकर्षक इमारत अंतिम रूप लेने जा रही है। बिजली उपलब्ध नहीं होने से आंतरिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। इसे देखकर महावितरण की मांग पर सकारात्मक रुख अपनाया।
उक्त परियोजना के लिए निधि कम पड़ने पर सरकार से अतिरिक्त निधि की माग की गई थी। स्वीकृति नहीं मिलने से जिप ने सेस निधि से खर्च का प्रबंध किया है। फर्नीचर खर्च के लिए सरकार से सहायता प्राप्त करने सभी पदाधिकारी मुख्यमंत्री व ग्राम विकास मंत्री से मुलाकात करेंगे छत्रपति संभाजीनगर शहर में जिप की करोड़ों रुपये मूल्य की महत्वपूर्ण जमीनें अतिक्रमण की चपेट में है व कई मामले न्यायालय में लंबित है। इन मामलों में प्रभावी पैरवी के लिए वरिष्ठ विधिज्ञ नियुक्त करने का प्रस्ताव आगामी आम सभा में रखा जाएगा।
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यही नहीं, अतिक्रमण हटाने व जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष दल गठित करने का निर्णय भी लिया गया है। वित्त व निर्माण सभापति सचिन गरड ने कहा कि नई प्रशासनिक इमारत के लिए बिजली कनेक्शन जरूरी था। छत्रपति संभाजीनगर महावितरण की मांग पर सभी पदाधिकारी व सदस्यों से चर्चा कर 6 गुंठा जमीन देने का अहम निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में जिप पर बिजली बिल का अतिरिक्त भार न पड़े, इसलिए इमारत को सौर ऊर्जा पर संचालित करने की योजना बनाई गई है।