Sambhajinagar Statue Survey Missing Records: छत्रपति संभाजीनगर शहर में महापुरुषों, समाज सुधारकों और ऐतिहासिक हस्तियों के सम्मान में स्थापित प्रतिमाओं को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मनपा द्वारा किए गए हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, शहर के विभिन्न हिस्सों में कुल 115 प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन इनमें से 51 प्रतिमाओं के संबंध में प्रशासन के पास कोई भी आधिकारिक जानकारी या अनुमति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाती है, बल्कि शहर के नियोजित प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मनपा के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर के दस जोनों में मौजूद कुल 115 प्रतिमाओं में से केवल 53 प्रतिमाएं ही विधिवत अधिकृत श्रेणी में दर्ज हैं। शेष में से 11 प्रतिमाओं को प्रशासन ने स्पष्ट रूप से अनधिकृत माना है, जबकि 51 ऐसी प्रतिमाएं हैं जिनकी वैधता या स्थापना के इतिहास के बारे में मनपा के पास कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इसके बावजूद ये प्रतिमाएं वर्षों से शहर के विभिन्न चौकों और प्रमुख स्थानों पर स्थापित हैं।
यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब लगभग पांच वर्षों के अंतराल के बाद नवनिर्वाचित नगरसेवकों ने सदन में प्रतिमाएं स्थापित करने और सड़कों के नामकरण के प्रस्तावों की झड़ी लगा दी। मई माह की सामान्य सभा में पेश किए गए 43 विषयों में से लगभग 18 से 20 प्रस्ताव केवल चौकों-सड़कों के नामकरण और प्रतिमाओं से जुड़े थे। नगरसेवकों द्वारा नए स्मारकों की मांग के बीच, पुराने स्मारकों का रिकॉर्ड न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
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अब मुख्य चुनौती उन प्रतिमाओं को लेकर है जिन्हें अनधिकृत बताया गया है या जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नई प्रतिमाओं की अनुमति देने या नामकरण करने से पहले छत्रपति संभाजीनगर में पहले से मौजूद सभी प्रतिमाओं का एक विधिवत और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है। प्रशासन को यह तय करना होगा कि वह इन स्थापित प्रतिमाओं की वैधता की जांच कैसे करेगा और उनके संरक्षण के लिए क्या ठोस नीति अपनाएगा।