Chhatrapati Sambhajinagar Power Cut: छत्रपति संभाजीनगर में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है और पारा 41 डिग्री के पार पहुंच गया है। ऐसे में बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली ने नागरिकों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। शुक्रवार को मानसून पूर्व मरम्मत (Pre-Monsoon Maintenance) के नाम पर घंटों बिजली गुल (Power Cut) रहने के बाद, शनिवार को भी शहर के कई हिस्सों में 'पावर कट' का तांडव जारी रहा। बिना किसी पूर्व सूचना के बार-बार हो रही इस कटौती ने भीषण गर्मी में नागरिकों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। लोग इस बात से नाराज हैं कि प्रस्तावित काम के नाम पर शुक्रवार को तो तैयारी का मौका मिला, लेकिन शनिवार को अचानक हुई कटौती ने सबको अधर में लटका दिया।
बिजली की इस मनमानी का सबसे बुरा असर एमजीएम (MGM) और उसके आसपास के इलाकों में देखने को मिला। शनिवार को दिनभर बिजली आती-जाती रही, जिससे घरेलू कामकाज के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियां भी पूरी तरह ठप पड़ गईं। शाम के समय जब बाजारों में रौनक होती है और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ती है, तभी अचानक बिजली गुल (Power Cut) होने से दुकानदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। सबसे चिंताजनक स्थिति उन विद्यार्थियों की रही जिनकी महाविद्यालयीन परीक्षाएं (College Exams) चल रही हैं; अंधेरे और उमस भरी गर्मी के कारण छात्रों को पढ़ाई करने में भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट का सामना करना पड़ा।
शनिवार रात करीब 8 बजे जाकर आपूर्ति बहाल तो हुई, लेकिन नागरिकों का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। बार-बार हो रही ट्रिपिंग और अघोषित कटौती को लेकर रहवासियों ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि हर साल मरम्मत के नाम पर घंटों बिजली काटी जाती है और करोड़ों का बजट खर्च होता है, फिर भी हल्की सी धूप या तेज हवा चलने पर पूरा सिस्टम फेल हो जाता है। नागरिकों ने अब संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि पुराने बुनियादी ढांचे को बदला जाए और इस रोज-रोज की 'आंख-मिचौली' का कोई स्थायी तकनीकी समाधान निकाला जाए ताकि आने वाले मानसून में ऐसी नौबत न आए।
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बिजली की इस अनियमितता ने न केवल घरेलू जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि 'वर्क फ्रॉम होम' करने वाले पेशेवरों और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी संकट खड़ा कर दिया है। लैपटॉप और वाई-फाई राउटर चार्ज न होने के कारण कई लोगों का जरूरी काम अधूरा रह गया, जिससे उन्हें आर्थिक क्षति और मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
वहीं दूसरी ओर, अस्पतालों और छोटे क्लीनिकों में भी बिजली के बार-बार जाने से मरीजों को भीषण गर्मी में भर्ती रहना पड़ा, जो उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। छत्रपति संभाजीनगर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि बिजली विभाग ने समय रहते अपनी वितरण प्रणाली को स्मार्ट और दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में यह जनाक्रोश सड़क पर उतर सकता है।