RTI Misuse Controversy In Sambhajinagar MANPA: सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में इसी कानून के कथित दुरुपयोग की शिकायतें सामने आने लगी हैं।
मनपा के नगर नियोजन विभाग में गुरुवार शाम एक व्यक्ति द्वारा कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों को धमकाने और हंगामा करने की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है। महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे ने संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
महानगरपालिका के सूत्रों के अनुसार, नगर नियोजन विभाग में भवन निर्माण अनुमति, स्वीकृत नक्शे और अन्य तकनीकी अभिलेखों से संबंधित बड़ी संख्या में आरटीआई आवेदन लगातार प्राप्त हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग इन दस्तावेजों में त्रुटियां तलाशने के बाद संबंधित अधिकारियों और निर्माण व्यवसायियों पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकार की गतिविधियों को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, एक ही व्यक्ति द्वारा 70 से अधिक आरटीआई आवेदन दायर किए गए हैं। इनमें से अधिकांश मामलों से उसका प्रत्यक्ष संबंध भी नहीं बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में एक साथ मांगी जा रही सूचनाओं के कारण विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ने की बात भी सामने आई है।
बताया गया कि गुरुवार को कार्यालयीन समय समाप्त होने के बाद एक व्यक्ति नगर नियोजन विभाग पहुंचा और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें धमकाने लगा। स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षा कर्मियों को बुलाना पड़ा, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति वहां से चला गया। घटना के बाद कर्मचारियों में भय का वातावरण बन गया।
महानगरपालिका में RTI के कथित दुरुपयोग का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। तत्कालीन महापौर त्र्यंबक तुपे ने भी इस प्रकार के मामलों की जानकारी एकत्र कर तत्कालीन पुलिस आयुक्त से जांच की मांग की थी। कुछ समय तक ऐसी गतिविधियों में कमी आई थी, लेकिन अब एक बार फिर इस तरह की घटनाओं की चर्चा तेज हो गई है।
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आयुक्त अमोल येडगे ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय में कर्मचारियों को धमकाने जैसी घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे मामले में पुलिस शिकायत दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, महानगरपालिका के भीतर यह चर्चा भी है कि यदि ऐसे मामलों की जानकारी पहले से थी तो समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। इसको लेकर कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट