RTI बदलावों पर आर-पार: मुख्य सूचना आयुक्त से चर्चा विफल, 5 जुलाई से आमरण अनशन पर अड़े समाजसेवी अन्ना हजारे

Maharashtra Anna Hazare: RTI कानून में बदलावों के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन तय। मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से वार्ता विफल होने के बाद अन्ना हजारे 5 जुलाई से आमरण अनशन पर बैठने के फैसले पर अटल।
Anna Hazare to go on a hunger strike from July 5 after talks with Chief Information Commissioner Rahul Pande failed over the controversial amendments made to the RTI Act.
अन्ना हजारे (सोर्स- सोशल मीडिया)
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RTI Act 2026 Anna Hazare: सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून में 12 जून 2026 को किए गए नए बदलावों को लेकर देश के वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपना विरोध और तेज कर दिया है। नए नियमों के खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर रहे अन्ना हजारे ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए, तो वे 5 जुलाई से आमरण अनशन शुरू करेंगे। इस बीच गतिरोध समाप्त करने के प्रयास में राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने रालेगन सिद्धि पहुंचकर अन्ना हजारे से लंबी चर्चा की, लेकिन बातचीत किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।

रालेगन सिद्धि में हुई महत्वपूर्ण बैठक

मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने अन्ना हजारे से मुलाकात कर उनकी आपत्तियों और मांगों को विस्तार से समझने का प्रयास किया। दोनों पक्षों के बीच आरटीआई कानून में हुए बदलावों के प्रभाव और उनकी जरूरत पर चर्चा हुई। हालांकि बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई, जिससे विवाद और गहरा गया है।

5 जुलाई से अनशन की चेतावनी

बैठक के बाद अन्ना हजारे ने दोहराया कि वे अपने प्रस्तावित अनशन के फैसले से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून देश में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक मजबूत माध्यम है, इसलिए इसमें ऐसे बदलाव स्वीकार नहीं किए जा सकते जो जनता के अधिकारों को कमजोर करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सकारात्मक पहल नहीं की तो 5 जुलाई से उनका आमरण अनशन शुरू होगा।

विशेषज्ञों के साथ बैठक बुलाने की मांग

अन्ना हजारे ने सरकार से आग्रह किया है कि 5 जुलाई से पहले आरटीआई क्षेत्र के विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संबंधित पक्षों की एक विशेष बैठक बुलाई जाए। उनका कहना है कि इस बैठक में नए नियमों की व्यापक समीक्षा कर जनता के हित में निर्णय लिया जाना चाहिए। यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है और संतोषजनक समाधान निकलता है, तो वे अपने अगले कदम पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

‘जनता के अधिकारों की रक्षा जरूरी’

अन्ना हजारे ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य आम नागरिकों को शासन-प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अधिकार देना है। यह कानून अधिकारियों की सुविधा या संरक्षण के लिए नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सूचना प्राप्त करने का अधिकार कमजोर करना उचित नहीं है। हजारे ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो जनहित में आंदोलन ही एकमात्र विकल्प बचेगा।

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