छत्रपति संभाजीनगर में तबादलों के खिलाफ प्रदर्शन करतीं घाटी अस्पताल की नर्सें (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

छत्रपति संभाजीनगर: तबादलों के खिलाफ सड़कों पर उतरीं घाटी अस्पताल की नर्सें, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

Chhatrapati Sambhajinagar के घाटी अस्पताल में प्रशासनिक तबादलों के खिलाफ नर्सेज फेडरेशन ने मोर्चा खोल दिया है। महिला कर्मचारियों ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

आकाश मसने

Chhatrapati Sambhajinagar Ghati Hospital Nurses Protest: महाराष्ट्र गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के बैनर तले छत्रपति संभाजीनगर के घाटी अस्पताल की नर्सों ने गुरुवार को सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। अस्पताल परिसर में जुटी सैकड़ों नर्सों ने प्रशासनिक तबादला आदेशों को रद्द करने की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

नर्सों ने बयां किया अपना दर्द

छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन के दौरान नर्सों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लगातार तबादलों से कर्मचारियों, विशेषकर महिला कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर 3 साल में तबादले होने से पारिवारिक और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है।

तबादले से महिलाओं को होती है ये परेशानियां

नर्सेज फेडरेशन महाराष्ट्र की अध्यक्ष इंदुमती ने कहा कि नर्सिंग पेशे में अधिकतर महिलाएं कार्यरत हैं और उनके तबादले से पूरे परिवार पर असर पड़ता है। कई नर्सों के छोटे-छोटे बच्चे हैं और वे अपने बुजुर्ग माता-पिता और सास-ससुर की भी देखभाल करती हैं। ऐसे में तबादले से महिलाओं के सामने कई व्यावहारिक समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।

नर्सों ने उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

उन्होंने कहा कि किसी भी नर्स पर भ्रष्टाचार या किसी आर्थिक अनियमितता का आरोप नहीं है, फिर भी तबादले किए जा रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि इस फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए। प्रदर्शन कर रहे नर्सों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

वहीं, स्टाफ सदस्य मकरंद ने कहा कि सरकार की ओर से किए जा रहे तबादले के खिलाफ हम सड़क पर उतरे हैं। घाटी अस्पताल में पहले से ही हर दो-तीन साल में वार्ड स्तर पर आंतरिक तबादले होते रहते हैं। नर्सों का तबादला किसी आर्थिक लाभ या भुगतान प्रणाली से जुड़ा नहीं है, इसलिए इस तरह की व्यापक तबादला प्रक्रिया उचित नहीं है। सरकार के इस कदम के पिछे का उद्देशय साफ नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि इस प्रकार के तबादले लागू किए जाते हैं तो इसका सीधा असर महिला कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। ट्रांसफर होने की वजह से हमें पूरे परिवार के साथ दूसरे जगह शिफ्ट होना पड़ेगा। सरकार को हमें तबादला प्रक्रिया से अलग रखना चाहिए। इस संबंध में सरकार को आदेश जारी करना चाहिए।

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