Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply Project Update: छत्रपति संभाजीनगर शहर में निर्धारित समय पर जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलापूर्ति योजना से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करने तथा ठेकेदारों के लंबित भुगतानों को नियमों के अनुसार जांच के बाद ही जारी करने के निर्देश प्रशासन ने दिए हैं।
विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत और महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सदस्य सचिव अमगोथू श्री रंगा नायक ने स्पष्ट किया कि एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत दावों का भुगतान केवल पात्रता और सत्यापन के आधार पर ही किया जाएगा।
विभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में शहर की नई जलापूर्ति योजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों, विशेषकर न्यायालय में लंबित प्रकरणों के संदर्भ में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता विभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने की। इस अवसर पर सदस्य सचिव अमगोथू श्री रंगा नायक, पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार, ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक डॉ. विनय राठोड़, जीवन प्राधिकरण की मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे, परियोजना के ठेकेदार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में योजना के अंतर्गत पूर्ण और अपूर्ण कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने कहा कि ठेकेदारों द्वारा किए गए कुछ कार्यों के भुगतान लंबित होना गंभीर विषय है।
ठेकेदारों को निर्देश दिए गए कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि लंबित भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा सके। साथ ही प्राधिकरण को भी निर्देशित किया गया कि सभी लंबित दावों की संपूर्ण जानकारी लेकर नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नागरिकों तक समय पर पानी पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्य अभियंता मनीषा पलांडे ने बताया कि जिन ठेकेदारों ने आवश्यक दस्तावेजों के साथ बिल प्रस्तुत किए हैं, उनके भुगतान समय-समय पर किए गए हैं। जिन मामलों में दस्तावेज अपूर्ण हैं, उनकी जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि परियोजना ठेकेदार ने अपने लंबित भुगतानों को लेकर न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी संदर्भ में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण और ठेकेदार के बीच भुगतान की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे शेष भुगतानों से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत दावे सीधे तौर पर विभाग पर बाध्यकारी नहीं होंगे। सभी दावों की विधिवत जांच और सत्यापन के बाद ही पात्रता के आधार पर भुगतान किया जाएगा।