अस्पताल की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

करोड़ों का बजट, फिर भी स्वास्थ्य केंद्र पर ताला, निरीक्षण में खुली गंगापुर तहसील की बदहाली की पोल

Chhatrapati Sambhajinagar: गंगापुर तहसील के शेंदूरवादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में निरीक्षण के दौरान ताला लटका मिला। सभापति कविता चव्हाण ने लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश।

गोरक्ष पोफली

Government Hospital Negligence: महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की असल हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। Chhatrapati Sambhajinagar जिले के गंगापुर तहसील के सरकारी कार्यालयों में चल रहे जांच अभियान के दौरान शेंदूरवादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। पंचायत समिति की सभापति कविता चव्हाण और गटविकास अधिकारी (BDO) सुहास वाकचौरे के औचक निरीक्षण के दौरान इस अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला।

खाली पड़ा केंद्र, जोखिम में मरीजों की जान

निरीक्षण के दौरान स्थिति यह थी कि स्वास्थ्य केंद्र पर न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। शाम के समय या आपातकालीन स्थिति में जब मरीजों को तुरंत इलाज की जरूरत होती है, उस समय सरकारी केंद्र का बंद होना बेहद गंभीर मामला है।

निरीक्षण टीम ने पाया कि

  • अस्पताल के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ा हुआ था।
  • नियमों के विरुद्ध डॉक्टर और कर्मचारी मुख्यालय से गायब थे।
  • करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ग्रामीण जनता को प्राथमिक उपचार तक मयस्सर नहीं हो रहा है।

मुख्यालय छोड़ने का 'ट्रेंड' बना मुसीबत

स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नियमों के अनुसार मुख्यालय (Headquarters) पर नहीं रहते। अधिकांश कर्मचारी पास के शहरों से आना-जाना करते हैं, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को निजी अस्पतालों या शहर की ओर भागना पड़ता है। इसके अलावा, शेंदूरवादा केंद्र के अंतर्गत आने वाले उपकेंद्रों की हालत और भी खराब है। वहां न तो दवाइयां उपलब्ध हैं और न ही कर्मचारी कभी अपनी ड्यूटी पर नजर आते हैं।

दोषियों पर गिरेगी 'गाज'

पंचायत समिति की सभापति कविता चव्हाण ने इस लापरवाही को अक्षम्य बताया है। उन्होंने कहा कि "स्वास्थ्य सेवा एक 'अत्यावश्यक सेवा' है। ड्यूटी के दौरान ताला लगाकर गायब होना सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। हम इस मामले में तहसील स्वास्थ्य अधिकारी की भूमिका की भी जांच करेंगे। जिन कर्मचारियों ने अपने कर्तव्य में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।" बीडीओ सुहास वाकचौरे ने पुष्टि की है कि निरीक्षण की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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