

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation: एक ओर जहां छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) लगभग 1600 करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दबी है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा चार वरिष्ठ अधिकारियों के विदेशी 'अध्ययन दौरे' (Study Tour) को मंजूरी दिए जाने से शहर की राजनीति में उबाल आ गया है। इस दौरे पर करीब 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसे लेकर विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, यह दौरा 16 से 23 मई के बीच स्विट्जरलैंड और फ्रांस के लिए आयोजित किया गया है। इस दल में नगर नियोजन विभाग के उपनिदेशक मनोज गर्जे, उप आयुक्त अंकुश पांढरे, कार्यकारी अभियंता बालासाहेब शिरसाट और नगर नियोजक कौस्तुभ भावे जैसे रसूखदार नाम शामिल हैं। प्रशासन का तर्क है कि यह दौरा भूकंप इंजीनियरिंग, आपदा प्रबंधन और स्मार्ट सिटी क्षमता विकास जैसे तकनीकी विषयों के अध्ययन के लिए है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में भूकंप या सुनामी का खतरा न के बराबर है, ऐसे में इस अध्ययन की उपयोगिता समझ से परे है।
मनपा की आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो आंकड़े डराने वाले हैं:
ऐसे संकटपूर्ण समय में 40 लाख रुपये विदेश दौरे पर खर्च करने के फैसले को जनप्रतिनिधियों ने 'जनता के धन की खुली बर्बादी' करार दिया है।
विपक्ष का आरोप है कि इससे पहले भी अधिकारी कचरा प्रबंधन का अध्ययन करने के लिए इंदौर और अन्य शहरों के दौरे कर चुके हैं। लेकिन उन दौरों के बाद शहर की जमीनी हकीकत में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। अधिकतर रिपोर्ट केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रही हैं, जिससे विदेशी दौरों की वास्तविक मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर नियोजन विभाग के उपनिदेशक मनोज गर्जे ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह शासन के एक विस्तृत कार्यक्रम का हिस्सा है और दौरे के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी, जो शहर के दीर्घकालिक विकास में सहायक होगी।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि जब शहर अपनी मूलभूत समस्याओं (सड़क, पानी, कचरा) से जूझ रहा है, तब इस फिजूलखर्ची को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी दिनों में और उग्र रूप ले सकता है।