प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया ) 
औरंगाबाद

PM-उषा से बदला बामू का स्वरूप: शोध व नवाचार, BAMU विश्वविद्यालय में 77.40 करोड़ के विकास कार्य पूरे

Higher Education India: बामू विश्वविद्यालय में पीएम-उषा व विश्वविद्यालय निधि से 77.40 करोड़ रुपये के विकास कार्य पूरे किए गए हैं। कुलगुरु डॉ. फुलारी ने इसे गुणवत्ता व शोध के लिए अहम बताया।

अंकिता पटेल

PM-USHA Project Hindi News: छत्रपति संभाजीनगर बीते दो वर्षों के दौरान शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध संस्कृति और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है। विश्वविद्यालय निधि तथा केंद्र सरकार की पीएम-उषा परियोजना के अंतर्गत अब तक कुल 77 करोड़ 40 लाख रुपये के विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

यह जानकारी डॉ. बाबा साहब आंबेडकर मराठवाडा विश्वविद्यालय (बामू) के कुलगुरु ने अपने कार्यकाल की द्विवर्षीय उपलब्धियों के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। कुलगुरु डॉ। फुलारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षण। नवाचार और शोध को प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

बीते दो वर्षों में विश्वविद्यालय निधि से 43 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इनमें नाट्यशास्त्र विभाग के समीप 2,500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक रंगमंच। छात्रावासों का विस्तार। प्रबंधनशास्त्र विभाग की नई इमारतें। धाराशिव उपपरिसर में छात्रावास और पुस्तकालय भवन। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक शामिल है।

एजेंसियों से 1,983 शोधार्थियों को फेलोशिप मिल रही

उन्होंने बताया कि पीएम-उषा परियोजना के तहत 34 करोड़ 12 लाख रुपये की लागत से 'स्ट्रेस बस्टर रिक्रिएशन फैसिलिटी सेंटर', 'सेंटर फॉर फोक एंड कल्चरल स्टडीज ऑफ मराठवाड़ा' छात्रों के लिए भोजन कक्ष, स्मार्ट क्लासरूम, केमिकल टेक्नोलॉजी विभाग का विस्तार, छात्रावासों की मरम्मत तथा इलेक्ट्रक बसों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इन परियोजनाओं से छात्रों को आधुनिक शैक्षणिक और सहायक सुविधाएं मिलेंगी। कुलगुरु ने कहा कि शोध को बढ़ावा देने के लिए चार वर्षों से लंबित पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पुनः शुरू की गई है। वर्तमान में विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध शोध केंद्रों में केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों से 1,983 शोधार्थियों को फेलोशिप मिल रही है। जो राज्य में सर्वाधिक है।

इंडस्ट्री आधारित पाठ्यक्रम किए गए शुरू

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के लिए कई केंद्रों पर अचानक निरीक्षण किए गए, जिससे नकल के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 417 महाविद्यालयों का अकादमिक और प्रशासनिक ऑडिट पूरा किया गया है।

जिसके तहत ए. बी.सी और नो-ग्रेड श्रेणियों में मूल्यांकन किया गया। छात्र गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए युवक महोत्सव और 'आविष्कार' प्रतियोगिताओं का जिला स्तर पर आयोजन किया गया। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और छात्राओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डॉ. फुलारी ने कहा कि खेल। संस्कृति और उद्योग-विश्वविद्यालय समन्वय को मजबूत करने के लिए कई नई पहल की गई हैं। इंडस्ट्री आधारित पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।

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