Amravati Crop Damage Assessment: अमरावती जिले में मानसून की अनिश्चितता और बारिश की भारी कमी के कारण कृषि संकट गहराता नजर आ रहा है। शासन द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार बारिश में गिरावट और लगातार 4 हफ्तों की लंबी शुष्क अवधि के चलते जिले की कुल 8 तहसीलों में ट्रिगर-1 लागू पाया गया है। इनमें अचलपुर, अंजनगांवसुर्जी, भातकुली, चांदूर बाजार, चिखलदरा, धारणी, मोर्शी व वरुड का समावेश है।
राष्ट्रीय सूखा प्रबंधन मैनुअल और शासन के नियमों के अनुसार, सूखा या संकटग्रस्त स्थिति का आकलन दो प्रमुख चरणों में किया जाता है। ट्रिगर-1 पहला और अनिवार्य मानदंड है, जो बारिश की कमी और लगातार 3 से 4 सप्ताह तक शुष्क मौसम बने रहने पर सक्रिय होता है। यदि किसी क्षेत्र में फसलों की वृद्धि के मुख्य समय में बारिश रुक जाती है, तो उसे ट्रिगर-1 के तहत दर्ज किया जाता है।
प्रभाव : लगातार 4 हफ्तों से बारिश न होने के कारण सोयाबीन, कपास और तुअर जैसी मुख्य खरीफ फसलें सूखने की कगार पर हैं। बारिश की कमी से जल निकायों में पानी का स्तर घटने लगा है, जिससे आने वाले समय में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।
ट्रिगर-1 लागू होने के बाद अब प्रशासन द्वारा दूसरे चरण यानी ट्रिगर-2 का आकलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत उपग्रह तस्वीरों, वनस्पति सूचकांक, और मृदा नमी की जांच की जाएगी। इसके साथ ही कृषि व राजस्व विभाग द्वारा धरातल पर फसलों के नुकसान का जायजा लिया जाएगा, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा तथा राहत उपाय प्रदान किए जाएंगे।
दर्यापुर तहसील में पिछले एक से डेढ़ महीने से बारिश न होने के कारण क्षेत्र में सूखाग्रस्त स्थिति पैदा हो गई है, जिससे किसान भारी संकट का सामना कर रहे हैं। फसलों को जरूरत के मुताबिक पानी न मिलने से उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इसके चलते किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। बारिश की कमी से बने इन हालातों को लेकर स्थानीय स्तर से प्रशासन को विभिन्न रिपोर्ट भेजी गई हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि उन्हें अब तक अपेक्षित सरकारी मदद नहीं मिली है।
ऐसे संकट के समय में यह उम्मीद की जाती है कि संबंधित जनप्रतिनिधि आगे आएं, अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से सरकार को अवगत कराएं और तुरंत राहत राशि के लिए लगातार प्रयास करें। फसलें नष्ट होने का डर, बढ़ता हुआ उत्पादन खर्च और बारिश की अनिश्चितता के कारण किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। इसलिए केवल निरीक्षण, कोरे आश्वासनों या कागजी रिपोर्टों तक सीमित न रहकर तुरंत जमीनी पंचनामा (सर्वे), मुआवजा और आवश्यक सरकारी उपाय लागू करने की मांग किसान कर रहे हैं।