अमरावती गर्भवती महिला की मौत (सोर्सः सोशल मीडिया)
अमरावती

सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली, गर्भवती ने दम तोड़ा, काटकुंभ से नागपुर तक अस्पतालों के कांटे चक्कर

Amravati Pregnant Woman Death : अमरावती के मेलघाट क्षेत्र की 32 वर्षीय गर्भवती सलमा परवीन शेख हनीफ की नागपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई।

आंचल लोखंडे

Highlights

  • चिखलदरा तहसील के काटकुंभ निवासी 32 वर्षीय सलमा परवीन शेख हनीफ की नागपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हुई।

  • परिजनों के अनुसार, प्रसूति से पहले ही गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी।

  • महिला को चिखलदरा ग्रामीण अस्पताल से अचलपुर, फिर अमरावती के डफरिन और इर्विन अस्पताल भेजा गया।

Amravati Hospital Negligence Allegations: समय पर इलाज नहीं मिलने से एक गर्भवती महिला की मौत होने का मामला रविवार की सुबह सामने आया है। मृतक महिला की पहचान चिखलदरा तहसील के काटकुंभ निवासी 32 वर्षीय सलमा परवीन शेख हनीफ के रूप में हुई है। उपचार के दौरान नागपुर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई।

परिजनों ने आरोप लगाया कि समय पर उचित उपचार और एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी। प्रसूति से पहले ही गर्भस्थ शिशु की मौत जानकारी के अनुसार, सलमा परवीन की चौथी प्रसूति थी। इससे पहले उसे तीन संतान हैं। तीनों लड़कियां है। पति टेलर का काम करता है।

नागपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह

शुक्रवार को सुबह 11 बजे उसे प्रसूति के लिए चिखलदरा ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से दोपहर 1 बजे अचलपुर उपजिला अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक उपचार के बाद दोपहर 3.30 बजे उसे अमरावती के जिला महिला अस्पताल (डफरिन) रेफर किया गया। यहां रक्त के नमूने लेकर जांच की गई। परिजनों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में महिला को डेंगू पॉजिटिव बताया गया। इस बीच प्रसूति से पहले ही गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद इसी रात करीब 9.30 बजे डफरिन अस्पताल प्रशासन ने महिला को जिला सरकारी अस्पताल (इर्विन) रेफर कर दिया। परिजनों का आरोप है कि वहां गर्भ में मृत शिशु को निकालने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे नागपुर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी गई।

आयुक्त के मेलघाट दौरे के बीच घटना

मेलघाट क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और मातृ-शिशु कल्याण योजनाओं की समीक्षा के लिए स्वास्थ्य सेवा आयुक्त डॉ. संजय काटकर 23 और 24 अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर थे। आयुक्त के दौरे के दौरान ही एक गर्भवती महिला को उपचार के लिए यहां से वहां भटकना पड़ा और अंततः उसकी मौत हो गई। इस घटना ने मेलघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसी गर्भवती महिला को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाता है। मेलघाट जैसे दुर्गम आदिवासी क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में इस घटना के कारणों की जांच कर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि महिला को समय पर उपचार क्यों नहीं मिल पाया और संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में कहां चूक हुई।

निजी एंबुलेंस से नागपुर के अस्पताल में ले गए परिजन

आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजनों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा 108 और 102 से संपर्क किया, लेकिन उन्हें एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। जिला शल्य चिकित्सक से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो पाई। आखिरकार परिजनों ने अपने खर्च पर निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और महिला को नागपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिजनों का कहना है कि अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर लगाने और उपचार में हुई देरी के कारण महिला की जान चली गई। उन्होंने इस मामले में जिलाधिकारी आशिष येरेकर से शिकायत करने की बात कही है, इस घटना में उपचार की व्यवस्था और एंबुलेस सेवा की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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