कोंग्रेस क वरिष्ठ सदस्यों की बैठक (सोर्स - फोटो नवभारत)  
अमरावती

विधान परिषद चुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी 'लापता', पार्टी खेमे में बढ़ी भारी बेचैनी, बैठकें शुरू!

MLC Election: अमरावती विधान परिषद चुनाव के मतदान से 48 घंटे पहले कांग्रेस उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख के 'लापता' होने से सियासी हड़कंप मच गया है। संकट से उबरने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने आपात बैठक बुलाई।

केतकी मोडक

Amravati MLC Election Congress Candidate Missing: अमरावती विधान परिषद चुनाव के मतदान में महज 48 घंटे शेष रहते कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार हर्षजीत देशमुख के सार्वजनिक रूप से सक्रिय नहीं होने और संपर्क नहीं होने की खबरों ने जिले की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उम्मीदवार की अनुपस्थिति को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मतदान के एक दिन पूर्व ली गई बैठक में भी कोई मजबूत हल न निकलने के चलते अब समर्थित मतदाताओं में भी निराशा उठ रही है।

कांग्रेस नेताओं की बैठक

सांसद बलवंत वानखड़े के कार्यालय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर, डॉ। सुनील देशमुख, जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख, शहराध्यक्ष बबलू शेखावत, पूर्व विधायक राजकुमार पटेल, विरेन्द्र जगताप, पूर्व महापौर विलास इंगोले, मिलिंद चिमोटे, सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे।

धनबल का उपयोग कर रही भाजपा : देशमुख

बैठक में बुधवार शाम जिले के सभी कांग्रेस समर्थित मतदाताओं एवं स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। नेताओं का कहना है कि जमीनी स्तर की स्थिति और मतदाताओं की राय जानने के बाद ही पार्टी अपनी आगे की रणनीति तय करेगी। इस दौरान डॉ। सुनील देशमुख ने चुनाव में धनबल के इस्तेमाल को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जिस प्रकार की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। हालांकि भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विश्वकर्मा को समर्थन देने पर होगा विचार !

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस की आगामी बैठक में वंचित बहुजन टिदो वोट दो आघाड़ी के उम्मीदवार नीलेश विश्वकर्मा को समर्थन देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मतदान से पहले कांग्रेस की रणनीति क्या होगी, इस पर अब सभी की नजरें गुरुवार की बैठक पर टिकी हैं।

तो किसी स्थानीय को क्यों टिकट नहीं

विधान परिषद चुनाव के दौरान सामने आ रही स्थिति को देखते हुए अब कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं में भी सवाल उठ रहे हैं कि कांग्रेस की बार-बार हो रही फजीती के कारण किसी स्थानीय व पार्टी के प्रति निष्ठावान व्यक्ति को ही टिकट क्यों नहीं दिया जाता। इस पर भी पिछली बार की तरह कमजोर उम्मीदवार को सामने रखा गया। किंतु वह भी वापस चला जाने पर कार्यकताओं में स्थानीय नेतृत्व पर दबी जबान से सवाल उठाए रहे हैं।

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