अचलपुर कृषि कार्यालय  (सोर्सः सोशल मीडिया)
अमरावती

Amravati News: अचलपुर तहसील कृषि कार्यालय में 20 पद खाली, किसानों की सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा असर

Achalpur Agriculture Office Vacancies: अचलपुर तहसील कृषि कार्यालय में 20 पद खाली हैं। स्टाफ की कमी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। किसानों की सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है।

आंचल लोखंडे

Achalpur Agriculture Department: अचलपुर तहसील कृषि कार्यालय में बड़े पैमाने पर पद खाली होने से कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड रहा है। किसानों के हित की योजनाओं और उपक्रमों को लागू करते समय बाधा आ रही है। शासन-प्रशासन इस पर तुरंत ध्यान देकर खाली पदों को भरे, ऐसी मांग किसान वर्ग की ओर से उठ रही है। अचलपुर तहसील कृषि विभाग में भौगोलिक क्षेत्र 68,096 हेक्टेयर है और खेती के तहत क्षेत्र 53,777 हेक्टेयर है।

इसमें से खरीफ फसल का 38636 हेक्टेयर, तो रबी फसल का औसत क्षेत्र 9.324हेक्टेयर है।किसानों की संख्या 43,266 है और कुल 127 गांव हैं। इस कार्यालय के माध्यम से ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर, मुफ्त बीज वितरण, मिट्टी परीक्षण, अतिवृष्टि, बेमौसम बारिश के पंचनामे, प्रधानमंत्री किसान सम्मान, नमो महासम्मान योजना, इसके अलावा महाराष्ट्र ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कृषि विभाग की ओर से व्यक्तिगत लाभ पर बागवानी और खेती संबंधी मार्गदर्शन आदि काम किए जाते हैं। इसलिए इस कार्यालय में हमेशा किसानों का आना-जाना लगा रहता है। किसानों के लिए महत्वपूर्ण इस विभाग की ओर घोर लापरवाही बरती जा रही है।

कर्मचारियों पर 10-12 गांवों का जिम्मा

अचलपुर तालुका कृषि कार्यालय में उपकृषि अधिकारी के पांच में से चार पद पर लोग कार्यरत हैं, लेकिन उनमें से एक को अमरावती जिला अधीक्षक कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है, तो दूसरे को गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी का प्रभार दिया गया है, इसलिए केवल दो ही उपकृषि अधिकारी कामकाज संभाल रहे हैं। तो सहायक कृषि अधिकारियों के बड़े पैमाने पर पद खाली होने से कुछ पर तो 10-12गांवों का जिम्मा आ गया है, जिससे काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। नतीजतन, काम पर असर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधा

शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते कृषको को दिक्कते हो रही। एक तरफ कार्यालय में सुविधाओं का अभाव है, तो दूसरी तरफ खाली पदों के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, और शासन की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करते समय प्रशासन को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की परेशानी बढ़ रही है। शासन-प्रशासन इस पर तुरंत ध्यान दे, ऐसी मांग किसानों की ओर से की जा रही है।

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