Akola Farmer Drought Situation: अकोला जिले में करीब 41 दिनों से बारिश पूरी तरह से रुकी हुई है। पूरा श्रावण माह बीत गया है और बारिश नहीं हुई, जिसके कारण जिले के किसान पूरी तरह चिंता में हैं। परिस्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है। सोयाबीन और कपास की फसलों की स्थिति बहुत ही खराब हो रही है। विशेष बात यह है कि यह दोनों फसलें फूल पर हैं। बारिश का दूर दूर तक पता नहीं है।
अकोला जिले में सिर्फ दो स्थानों पर कुछ बारिश हुई है। पूरा जिला लगातार बारिश की राह देख रहा है। सबसे अधिक तकलीफ इस बात की है कि जिले में सिंचाई के साधन नहीं के समान हैं। उस पर अब जल प्रकल्पों का जलस्तर भी नहीं बढ़ रहा है। इस कारण किसानों की चिंता और बढ़ गयी है।
अकोला जिले के बारशीटाकली तालुका के महान गांव के पास काटेपूर्णा नदी पर बना काटेपूर्णा बांध में जलस्तर घटा अकोला शहर को जलापूर्ति करने वाले महान गांव में स्थित काटेपूर्णा बांध में अब सिर्फ 23.39 प्रश जल भंडारण रह गया है। इस बांध से अब सिंचाई के लिए दिया जाने वाला पानी बंद कर दिया गया है।
यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इन दिनों में इस बांध में 95।17 प्रश जल भंडारण था। उस तुलना में इस वर्ष स्थिति बहुत ही अधिक खराब है। इस समय शहर में हर सातवे दिन नलों द्वारा जलापूर्ति की जा रही है। इसी तरह करीब 41 दिनों से बारिश न होने के कारण जमीनी जलस्तर भी नीचे जा रहा है।
अकोला जिला में कांग्रेस पार्टी द्वारा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रकाश तायड़े ने मांग की है कि, जिले के किसानों को तुरंत 50 हजार रु. प्रति हेक्टेयर के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाए, इसी तरह बीमा राशि का 25 प्रश अग्रिम भुगतान किया जाए, इसके अलावा भी कई मांगें सरकार के सामने रखी गयी हैं।
इसी के साथ साथ हाल ही में जिले की तेल्हारा तहसील में किसानों द्वारा मोर्चा निकालकर सूखे अकाल की मांग की गयी है। किसानों का कहना है कि सूखे अकाल की स्थिति में सरकार द्वारा जो मदद दी जानी चाहिए वह मदद सरकार ने तुरंत करनी चाहिए, इसके अलावा भी कुछ किसान संगठनों द्वारा सरकार से मांग की गयी है कि सरकार तुरंत जिले के किसानों को आर्थिक मदद का हाथ दें।
हाल ही में वरिष्ठ भाजपा विधायक रणधीर सावरकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महोदय से किसानों की ओर गंभीरता से ध्यान देने का निवेदन किया है। उन्होंने कहा है कि अकोला के साथ साथ संपूर्ण विदर्भ में किसानों की हालत बारिश न होने के कारण लगातार बिगड़ रही है। खरीफ फसलें हाथों से जाने की स्थिति में हैं।