वायरल फीवर (सौ. सोशल मीडिया )
Akola News In Hindi: बदलते मौसम, बारिश के कारण घर-घर में वायरल फीवर के मरीज देखे जा रहे हैं। सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक उपाय कर रही हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आज भी स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं।
जब गांव में लोगों को बुखार, खांसी, सिरदर्द, सर्दी, जुकाम आदि व्याधियां होती हैं तो वे आज भी झोलाछाप डॉक्टरों का ही सहारा लेते हैं। कई झोलाछाप डॉक्टर मामूली दवाएं देकर लोगों का स्वास्थ्य ठीक कर देते हैं तो कई डॉक्टर डिग्री डिप्लोमा के बिना गलत इलाज कर देते हैं जिससे लोगों की जान पर बन आती है। इस सबके बावजूद ग्रामवासी ऐसे लोगों से ही इलाज करवाते हैं क्योंकि सरकारी अस्पताल गांव से दूर हैं। जैसे-तैसे अस्पताल पहुंच जाएं तो कभी डॉक्टर नहीं मिलते।
पिछले कोरोना काल से
झोलाछाप डॉक्टर क्षेत्र में अधिक सक्रिय होते नजर आ रहे हैं। यहां अधिकतर गांवों में ऐसे बिना डिग्री बोगस डॉक्टर अपना चलता फिरता क्लीनिक चला रहे हैं। कुछ गांव में बिना प्रशासन की परमिशन नर्सिंग होम चलाने की चर्चाएं क्षेत्र में है जो नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति खिलवाड़ है। जिसमें इस विषय की पूर्णता जांच की आवश्यकता है। जिस पर स्वास्थ्य विभाग को जागृत कर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। जिस पर लगातार अनदेखी हो रही है। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्र में अस्पतालों की आज भी स्थिति ठीक नहीं है।
डॉक्टर नियुक्त हैं परंतु वे समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। जब मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं तो कभी डॉक्टर छुट्टी पर होते हैं तो कभी दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं। बिना डिग्री प्राप्त डॉक्टरों से इलाज कराते हुए अनेक परिवारों के प्रमुख व्यक्तियों ने अपनी जानें गवाई है। ऐसे अनेक उदाहरण कोरोना की दूसरी लहर में देखे गए है।
अस्थायी व स्थायी क्लीनिक में कराते हैं इलाज
इस विषय को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई यहां एक बार भी नहीं हुई है। ऐसे में बोगस डॉक्टरों को लगातार छूट मिल रही है। इसके परिणामस्वरूप अब ग्रामीण क्षेत्र में यही झोलाछाप डॉक्टर लगातार सक्रिय होते जा रहे हैं। साथ ही चलते फिरते क्लीनिक के अलावा अब निजी क्लीनिक भी खोलकर बैठे हैं। इतना ही नहीं, कुछ गांव में बिना परमिशन नर्सिंग होम बिंदास चलाए जाने की चर्चाएं हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जो नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति खतरनाक बन गया है। जिसके चलते प्रशासन को इस विषय पर अब गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। जिसमें बिना डिग्री प्राप्त डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग क्षेत्र में एक बार फिर उठने लगी है।