पत्नी और बेटी की हत्या के दोषी को फांसी की सजा  सोर्स: AI
अकोला

चरित्र पर शक, रात में सोते समय पत्नी और 9 साल की मासूम बेटी को कुल्हाड़ी से काटा;अकोला कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

Akola Murder Case: अकोला जिला एवं सत्र न्यायालय ने पत्नी और 9 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में मनीष म्हात्रे को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।

मनीषा बोंदरे

Akola Murder Death Penalty: अकोला में पत्नी और 9 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी मनीष म्हात्रे को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। फैसला 22 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

पत्नी और बेटी की हत्या का मामला

पत्नी और 9 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में अकोला जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी मनीष म्हात्रे को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है। दूसरे जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तेजवंतसिंह संधू की अदालत ने यह फैसला 22 सितंबर 2026 को सुनाया। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

कुल्हाड़ी और लोहे का चाकू से की हत्या

अभियोजन के अनुसार, 24 अप्रैल 2024 की सुबह करीब 5.30 बजे एएसआई संजय भगत को स्टेशन डायरी अधिकारी के माध्यम से सूचना मिली कि मनीष म्हात्रे अपने दो चचेरे भाइयों के साथ थाने पहुंचा है और उसने पत्नी तथा बेटी की हत्या करने की जानकारी दी है।

सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, जहां रश्मि म्हात्रे (30) और उनकी 9 वर्षीय बेटी माही म्हात्रे मृत अवस्था में मिलीं। पुलिस ने घटनास्थल से रक्तरंजित कुल्हाड़ी और लोहे का चाकू बरामद किया।

पत्नी के चरित्र पर संदेह का आरोप

अभियोजन के मुताबिक, आरोपी पिछले करीब पांच वर्षों से पत्नी से अलग रह रहा था। रश्मि अपनी बेटी के साथ मुंबई में रहकर निजी नौकरी करती थीं। वह बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए अकोला आई थीं।

अभियोजन ने आरोप लगाया कि पत्नी के चरित्र पर संदेह के चलते आरोपी ने रात में सोते समय कुल्हाड़ी और चाकू से दोनों की हत्या की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रश्मि के 15 सप्ताह की गर्भवती होने की जानकारी भी सामने आई थी।

14 गवाहों के बयान दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने परिस्थितिजन्य, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और फांसी तथा जुर्माने की सजा सुनाई।

मामले के शिकायतकर्ता एएसआई संजय भगत हैं। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक मंगेश मानकर ने पैरवी की, जबकि जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक मनोज बहुरे ने की।

AI तकनीक ने दी आयुष्मान योजना को उड़ान, भारत में 33% आबादी को लाभ; योजना के 8 साल पूरे

दिल्ली में SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, वोटरों का भरोसा बढ़ाने के लिए EC को कदम उठाने का निर्देश

आयुष्मान भारत योजना के 8 साल पूरे, 12.69 करोड़ अस्पताल भर्ती मामलों को मंजूरी, जानें कितनी सफल रही PM-JAY

याचना नहीं अब रण होगा...बिहार के किसान परिवार से निकला वो लड़का, जिसकी कविताओं से थरथराती थी अंग्रेजी सरकार

बॉम्बे हाई कोर्ट की विजय माल्या को सख्त चेतावनी, सोशल मीडिया पर कोर्ट के दस्तावेज न करें पोस्ट