Akola Water Shortage:अकोला जिले में वर्षों की कमी और जलस्त्रोतों में लगातार घटते जलस्तर को देखते हुए संभावित जल संकट की स्थिति को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनय नावंदर ने ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों से पानी का अत्यंत सावधानी और मितव्ययिता के साथ उपयोग करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं तो आने वाले समय में जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए उपलब्ध पानी का सोच-समझकर उपयोग करे।
जिले में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे प्रमुख जलाशयों और बांधों में जलसंग्रह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। अल-नीनो के प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। जलस्रोतों में जलभंडारण कम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकती है। जिला प्रशासन वैकल्पिक जल स्रोतों की खोज और विभिन्न जल संरक्षण उपायों पर विशेष जोर दे रह रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि यदि जलसंग्रह की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो 64 गांवों को पानी उपलब्ध कराने वाली जलापूर्ति योजना में आवश्यकता के अनुसार पानी की आपूर्ति में कटौती का निर्णय भी लिया जा सकता है। हालांकि प्रशासन का प्रयास है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो और सभी गांवों को न्यूनतम आवश्यक पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
इसी क्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनय नावंदर ने मंगलवार को महान बांध, दगड़पारवा बांध, उनई बंधारा तथा सुकली स्थित जल शुद्धीकरण केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया तथा संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने उन्हें जलस्तर, जलापूर्ति व्यवस्था और संभावित आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी दी
निरीक्षण के दौरान सीईओ अनय नावंदर ने उनई बंधारे से गाद निकालने तथा वहां आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उपलब्ध जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने और जल संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। जलस्रोतों की नियमित निगरानी भी की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।