अलनीनो के कहर से देश के 282 जिलों में सूखे का खतरा, महाराष्ट्र और कर्नाटक होंगे सबसे अधिक प्रभावित

El Nino Effect in India: अलनीनो के प्रभाव से देश के 282 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। मानसून सीजन में 13 फीसदी कम बारिश होने से फसलों के उत्पादन और सूखे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
El Nino Effect in India drought risk
El Nino से देश के 282 जिलों में सूखे का खतरासोर्स: AI
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  • अलनीनो प्रभाव से मानसूनी बारिश कम

  • औसतन 759.4 मिलीमीटर बारिश हुई दर्ज

  • धान के रकबे में भारी गिरावट

India Drought Risk: देश के 38 प्रतिशत हिस्से में सूखे का संकट दिखने के आसार हैं। देश में अलनीनो के असर के कारण लगभग एक तिहाई हिस्से में सूखे का खतरा गहरा गया है। भारत मौसम विभाग के द्वारा जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मानसून सीजन (जून से सितंबर के दौरान) में देश में औसतन 759.4 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई, जो दीर्घकालिक औसत का मात्र 87 प्रतिशत है। यह साल 1901 के बाद 13वीं और साल 2001 के बाद चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश बतायी जा रही है।

282 जिलों में सामान्य से बेहद कम बारिश

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 282 जिलों यानी कुल 38 फीसदी हिस्से में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें से 34 जिले ऐसे हैं जहां बारिश सामान्य से 60 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा कम दर्ज की गई। अगर राज्यवार आंकड़ों पर गौर करें तो पंजाब में 41 प्रतिशत, राजस्थान में 22 प्रतिशत और विदर्भ क्षेत्र में 27 प्रतिशत तक बारिश में गिरावट आई है। इसके ठीक विपरीत ओडिशा में 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।

India Drought Risk
भारत में सूखा का खतरासोर्स: AI

राज्यों में गहराया संकट, केंद्रीय टीम करेगी दौरा

बारिश की भीषण कमी को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने 265 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। इसके अलावा कर्नाटक में भी खरीफ की फसल के लिए सूखा प्रभावित तालुकों की घोषणा की जा चुकी है। स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय टीम तीन अक्टूबर से प्रभावित इलाकों का जमीनी आकलन करेगी। केंद्र सरकार को फिलहाल अन्य राज्यों से मिलने वाले इनपुट का इंतजार है, जिसके बाद राहत सहायता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

धान की बुआई और खेती के रकबे पर सीधा असर

बारिश में असमानता का सबसे बड़ा असर फसलों के उत्पादन और खेती के रकबे पर पड़ा है। हालांकि खरीफ की कुल बुआई का रकबा पिछले साल के लगभग बराबर है, लेकिन धान का रकबा करीब 16.32 लाख हेक्टेयर तक घट गया है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में कुल खेती के रकबे में कमी दर्ज की गई है। इसके उलट उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी, मूंग और अरहर जैसी फसलों का रकबा बढ़ा है।

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कैसे तय होता है सूखे का आकलन

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बारिश की मात्रा से ही सूखे का अंदाजा नहीं लगाया जाता। सूखे का सटीक आकलन वर्षा के साथ-साथ फसल की स्थिति, मिट्टी की नमी, प्राकृतिक जलस्रोतों के जलस्तर, बुआई के समय और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता जैसे स्थानीय कारकों को देखकर किया जाता है। केंद्र सरकार अब इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर राहत राशि जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

Drought and El Nino in India
भारत में सूखा और अल-नीनोसोर्स: AI

अल नीनो का पता कैसे चलता है?

देश में अल नीनो के असर का पता मुख्य रूप से कमजोर मानसून, कम बारिश, सूखे जैसे हालातों और तापमान में असामान्य वृद्धि से चलता है। अल नीनो के सक्रिय होने पर दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में मानसून देर से पहुंचता है और सामान्य से काफी कम बारिश होती है।

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बारिश की कमी से खरीफ फसलों पर असर

बारिश की कमी के कारण देश के कई जिलों में मध्यम या गंभीर सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसका आकलन मौसम विभाग द्वारा वर्षा के आंकड़ों से किया जाता है। मानसूनी बारिश पिछड़ने से खरीफ फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और कपास की बुवाई प्रभावित होती है और पैदावार कम हो जाती है।

इसके साथ ही साथ कम बारिश के कारण बड़े बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर गिर जाता है, जिससे सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं पर उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही सिंचाई व बिजली उत्पादन प्रभावित होता है।

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