प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
अकोला

अकोला में अवैध उत्खनन का असर; 8 बार टेंडर के बाद भी 21 रेत घाटों की नीलामी अटकी, राजस्व का भारी नुकसान

Akola Revenue Loss News: अकोला में 38 में से केवल 17 रेत घाटों की नीलामी हो सकी है। अवैध उत्खनन के कारण ठेकेदार रुचि नहीं ले रहे हैं, जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।

रूपम सिंह

AkolaMining Department News: अक्टूबर 2025 में शुरू हुई निविदा प्रक्रिया फरवरी 2026 तक भी जारी है। तीन महीनों में आठ बार निविदा प्रक्रिया अपनाने के बावजूद जिले के 38 में से केवल 17 रेत घाटों की ही निकाली हो सकी है। शेष 21 घाटों की निलामी अब भी प्रलंबित है। इस कारण नौवीं बार निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यदि यह भी सफल नहीं हुई तो लाखों रुपये का राजस्व बर्बाद होगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक न लग पाने का सीधा असर निलामी पर दिखाई दे रहा है। खनिकर्म विभाग ने सितंबर से नवंबर के बीच पर्यावरण विभाग से अनुमति प्राप्त कर नई रेत नीति के अनुसार अक्टूबर 2025 में निलामी प्रक्रिया शुरू की थी। दिसंबर तक पांच बार निविदा मंगाने पर भी अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला।

नवंबर में तीन बार और दिसंबर में दो बार निविदा मंगाने के बाद केवल 16 घाटों की निलामी हो सकी। इसके बाद शेष 22 घाटों के लिए तीन बार प्रक्रिया अपनाई गई, लेकिन ठेकेदारों का प्रतिसाद नहीं मिला। आठवीं प्रक्रिया में केवल बालापुर तहसील के डोंगरगांव घाट की निलामी हुई, जिससे 13 लाख 59 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। अब तक 17 घाटों से 3 करोड़ 78 लाख रुपये का राजस्व सुनिश्चित हुआ है।

इन घाटों की नहीं हुई नीलामी

अकोला तहसील कपिलेश्वर, एकलारा, म्हैसांग, उगवा, बालापुर तहसील निंबी, बहादुरा, सागद, नागद, मांजरी, काजीखेड-2, मोखा, स्वरूपखेड, जानोरीमेल, मुर्तिजापुर तहसील कोलसरा-1, खापरवाडा-2, दुर्गवाडा, लोणसणा, सांगवी, बपोरी, पिंगला दापुरा, तेल्हारा तहसील वांगरगाव, इन 21 घाटों की निलामी अब भी अटकी हुई है और प्रशासन को राजस्व हानि की चिंता सताती है।

स्ट्रेचर पर लेटे दिखे कैप्टन स्मित मच्छार, फ्लाईदुबई हमले के बाद पहला VIDEO

गुजरात कर रहा क्लेम तो महाराष्ट्र बोल रहा मुंबई का पुत्र, आखिर कहां से हैं कैप्टन स्मित मच्छार?

ज्ञानेश कुमार पर बवाल के बीच मुख्य चुनाव अधिकारी का VRS, आरएस गोपालन ने बताई इस्तीफे की वजह

कुमाऊं में भीषण भूस्खलन, भरभराकर गिरा पहाड़, उत्तराखंड के 7 पर्वतीय जिलों में बारिश का अलर्ट

भारत के लिए अक्टूबर कूटनीति का व्यस्त महीना, जानें कौन-सी तारीखें हैं बेहद खास