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अकोला

अकोला मनपा चुनाव में पैनल सिस्टम बना सिरदर्द, डोर-टू-डोर से पहले अफरा-तफरी

Akola News: अकोला मनपा चुनाव प्रचार में अब केवल 4 दिन बचे हैं। पैनलों में तालमेल की कमी, बड़े प्रभाग, ठंड और मतदाताओं की बेरुखी से चुनौती बढ़ी है। महायुति में जोश, महाविकास में असंतोष दिख रहा है।

रूपम सिंह

Akola News in Hindi: अकोला मनपा चुनाव का प्रचार अब काउंटडाउन की ओर बढ़ रहा है और मनपा चुनाव में खड़े उम्मीदवारों के पास  प्रचार के लिए सिर्फ 4 दिन बचे होने से राजनीतिक वातावरण गरमा गया है। 13 जनवरी को शाम 5.30 बजे पब्लिक कैंपेन खत्म हो जाएगा और उसके बाद सिर्फ सीक्रेट कैंपेन (डोर टू डोर) शुरू होगा। सिर्फ चार दिन बचे होने की वजह से उम्मीदवारों ने दिन-रात मेहनत शुरू कर दी है। हालांकि, पैनल में तालमेल की कमी ने इस भागदौड़ में पार्टियों की सिरदर्दी बढ़ा दी है।  चुनाव की घोषणा हुए 6 दिन बीत चुके चुके हैं, लेकिन कई उम्मीदवार अभी तक अपने प्रभाग में मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाए हैं।

बड़े प्रभाग होने की वजह से हर मतदाता के घर तक पहुंचने की चुनौती बड़ी है। इन बचे हुए 4 दिनों में मीटिंग, पदयात्रा और नुक्कड़ सभाओं की प्लानिंग सेट होती नहीं दिख रही है।  इसके अलावा, कड़ाके की ठंड और मतदाताओं की बेरुखी से भी उम्मीदवारों को परेशानी हो रही है। वार्ड आधारित इस चुनाव में राजनीतिक पार्टियों ने तीन या चार उम्मीदवारों के पैनल उतारे हैं। शुरू में जो कैंडिडेट एक ग्रुप, एक आइडिया बता रहे थे, वे अब वोटिंग का दिन आते-आते बिखर गए हैं। कहा जा रहा है कि अगर पैनल में कोई उम्मीदवार मतदाताओं से संपर्क करने में खराब रहा या वोटर उससे नाखुश हुए, तो इसका असर पूरे पैनल पर पड़ेगा।

अपने सिंबल पर कर रहे फोकस

  • कमजोर उम्मीदवार की वजह से हम हार के गड्ढे मे क्यों गिरे. इसी भावना के साथ, पुराने उम्मीदवार अब पैनल के लिए कैंपेन करने के बजाय अपने पर्सनल जनसंपर्क और अपने सिंबल पर फोकस कर रहे हैं।
  •  कई प्रभागों में पुराने उम्मीवार अपने साथियों को छोड़कर अकेले वोटरों से मिलने लगे हैं। कई प्रभाग में पुराने उम्मीदवार के साथ कुछ ऐसे उम्मीदवार भी दिए गए हैं जिन्हें राजनीति का कोई शौक नहीं है।
  • पुराने उम्मीदवारी के लिए ऐसे नए उम्मीदवारों को साथ लेकर चलना मुश्किल हो रहा है। उन्हें चुनाव अभियान का तरीका, महदाताओं से बात करने का स्टाइल और राजनीतिक गणित समझाने में बहुत समय लग रहा है।

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कार्यकर्ताओं में अनबन

इस चुनाव कैंपेन में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच कैंपेन का फर्क साफ दिख रहा है। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ पब्लिक मीटिंग की हैं, जिससे वहां के कार्यकर्ताओं में जोश है। हालांकि, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सीनियर नेताओं की मीटिंग अभी तक नहीं हुई है। इस वजह से इन पार्टियों के उम्मीदवार इस चुनाव अभियान में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं में अनबन है। चूंकि राकापा (अजित पवार गुट) बीजेपी के साथ पावर में है, इसलिए ऐसा लगता है कि उन्हें अपने सीनियर्स के सपोर्ट की ज्यादा चिंता नहीं है।

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