Akola Mahan Road Project: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा घोषित अकोला से महान के बीच 29 कि।मी। के महत्वाकांक्षी सड़क चौड़ाइकरण प्रकल्प पर विभिन्न विभागों की अनुमतियों का पेच फंस गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) मिलने में हो रही देरी और भूमि अधिग्रहण की कानूनी समय सीमा नजदीक आने से परियोजना के लिए मंजूर निधि के केंद्र सरकार को वापस लौटने का खतरा पैदा हो गया है।
अकोला महान मार्ग के चौड़ाइकरण में बार्शीटाकली स्थित रेलवे फ्लाईओवर के साथ वन विभाग की जमीन, हाई ट्रांसमिशन बिजली लाइन तथा रेलवे विभाग की विभिन्न अनुमतियां महत्वपूर्ण हैं। पिछले करीब आठ महीनों से परियोजना की फिजिबिलिटी जांचने और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) तय करने की तकनीकी प्रक्रिया चल रही है। राजस्व विभाग ने गट क्रमांक 10 और 14 में एच-क्लास जमीन को सी-क्लास में बदलने की मंजूरी दे दी है, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण अनुमतियां अब भी लंबित हैं।
बार्शीटाकली में प्रस्तावित रेलवे अंडरब्रिज को रेलवे प्रशासन ने तकनीकी रूप से फिजिबल नहीं बताया है। रेलवे ने एनएचएआई के समक्ष यह शर्त रखी है कि भविष्य में स्थानीय नागरिकों की ओर से इस स्थान पर अंडरब्रिज की मांग नहीं की जाएगी, इसका लिखित आश्वासन दिया जाए। आवश्यक अनुमतियां नहीं मिलने के कारण 14 अगस्त को प्रस्तावित निविदा प्रक्रिया भी नहीं हो सकी।
भूमि अधिग्रहण के लिए जारी डी-नोटिस की अवधि समाप्त होने पर यह कानूनी रूप से रद्द हो सकती है।
ऐसी स्थिति में सड़क परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूर निधि वापस जाने की आशंका है। इससे महत्वाकांक्षी परियोजना के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
निधि वापस न जाए और परियोजना समय पर आगे बढ़े, इसके लिए सांसद अनूप धोत्रे ने स्वयं प्रयास तेज कर दिए हैं।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी विभिन्न विभागों से आवश्यक अनुमतियां समय पर प्राप्त करने के लिए प्रयासरत हैं।
यदि प्रलंबित एनओसी और अन्य मंजूरियां जल्द नहीं मिलीं, तो अकोला-महान सड़क चौड़ाइकरण परियोजना को और विलंब का सामना करना पड़ सकता है।