

Supreme Court On Jantar Mantar Protest: सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, पूर्व सीबीआई प्रमुख और अन्य अनुभवी सदस्य शामिल होंगे। अदालत बुधवार को समिति के गठन को लेकर अंतिम आदेश जारी कर सकती है।
समिति को प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से संबंधित पूरा सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर निशाना बनाए जाने को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने समिति के सदस्यों के नाम तय करने के लिए याचिकाकर्ताओं और अन्य हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि समिति के गठन को लेकर अंतिम आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि समिति में किन लोगों को सदस्य बनाया जाए, इस संबंध में हितधारकों और याचिकाकर्ताओं की ओर से दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पीठ ने सभी संबंधित पक्षों से उपयुक्त नाम और सुझाव अदालत के समक्ष पेश करने को कहा, ताकि समिति का गठन पारदर्शी, निष्पक्ष और संतुलित तरीके से किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि जंतर -मंतर पर विरोध प्रदर्शन और उसके दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएं। इससे समिति को पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर समझने और तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने में मदद मिलेगी।
अदालत ने विशेष रूप से उन महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों और आरोपों पर भी गौर करने का निर्देश दिया, जिन्हें दिल्ली समेत अन्य क्षेत्रों में विरोध मार्च के दौरान कथित तौर पर निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। समिति इन महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की भी जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट में इन मुद्दों को शामिल करेगी।
इस बीच, आज सुबह दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े गंभीर आरोपों का खंडन किया। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों
पर निगरानी रखने के लिए फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि उसने प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया।
पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई कानून के दायरे में थी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। वहीं, पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच के संकेत दिए हैं और पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी के गठन की दिशा में कदम बढ़ाया है।