अकोला निवेश शिखर परिषद  (सोर्सः सोशल मीडिया)
अकोला

अकोला में उद्योगों के लिए 1044 हेक्टेयर MIDC भूमि उपलब्ध, निवेशकों से आगे आने की जिलाधिकारी की अपील

Akola Investment Summit: अकोला जिला निवेशकर्ता शिखर परिषद में औद्योगिक निवेश और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने उद्यमियों से उद्योगों में बड़े निवेश का आह्वान किया।

आंचल लोखंडे

Akola Industrial Investment: अकोला जिले में उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं, पर्याप्त औद्योगिक भूमि, कृषि व कृषि प्रक्रिया उद्योगों की विशाल क्षमता, कुशल मानव बल तथा रेल और सड़क परिवहन की सशक्त व्यवस्था उपलब्ध है। इस अनुकूल वातावरण का लाभ उठाकर उद्यमियों को जिले में बड़े पैमाने पर निवेश करना चाहिए और मूल्यवर्धित उद्योगों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ऐसा आवाहन जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने किया। जिला उद्योग केंद्र द्वारा सोमवार को होटल आरजी एक्सक्लूसिव में आयोजित जिला निवेशकर्ता शिखर परिषद का उद्घाटन जिलाधिकारी वर्षा मीणा के हाथों हुआ।

इस अवसर पर अमरावती विभाग की सहायक आयुक्त रंजना पोल, महाराष्ट्र उद्योग व्यापार व निवेश सुविधा (मैत्री) के नोडल अधिकारी नरेंद्र औटी, एमआईडीसी के व्यवस्थापकीय संचालक राजेंद्र जाधव, अकोला इंडस्ट्रयल एसोसिएशन के मनोज खंडेलवाल, विदर्भ चेंबर के अध्यक्ष नीरज वोरा, सनदी लेखापाल अंकित गुप्ता, पंकज अग्रवाल सहित अनेक अधिकारी, उद्यमी और संभावित निवेशक उपस्थित थे। औद्योगिक विकास की संभावनाएँ जिलाधिकारी मीणा ने कहा कि अकोला का स्थान उत्तर और दक्षिण भारत की बाजारों से जुड़ा हुआ है। रेल और राष्ट्रीय महामार्गों के माध्यम से मालपरिवहन और बाजार तक पहुंच आसान है।

अकोला में निवेश को बढ़ावा देने पर जोर

समृद्धि महामार्ग से जुड़ाव जिले के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। शिवनी हवाई अड्डे के विस्तार के लिए 200 करोड़ रुपये की प्रशासकीय मंजूरी मिल चुकी है, जिससे निर्यातकों को उत्पादन निर्यात में सुविधा होगी। जिले में लगभग 1044 हेक्टेयर एमआईडीसी का औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों के लिए लगभग 190 औद्योगिक भूखंड तैयार हैं। नए उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को इन भूखंडों का लाभ उठाने का आवाहन किया गया।

कृषि आधारित उद्योगों पर दिया जा रहा जोर

जिले की मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था, कपास उत्पादन, दाल मिल उद्योग और कृषि प्रक्रिया उद्योग इसकी प्रमुख आर्थिक ताकत है। इसलिए केवल कच्चे कृषि उत्पादों की बिक्री के बजाय मूल्यवर्धित उत्पादन उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, कपास आधारित उद्योग और निर्यातोन्मुख उद्योगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय की विशेषज्ञता, कृषि क्षेत्र में किए गए विविध अनुसंधान और कुशल-अकुशल मानव बल का उपयोग कर जिले में नए उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि और कृषि प्रक्रिया उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए निर्यातक्षम उत्पादन की पहचान, गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, आवश्यक प्रमाणपत्र और मूल्यवर्धन पर उद्यमियों को विशेष ध्यान देना चाहिए।

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