फिनेंस कंपनी ने कर्ज वसूली के लिए दिव्यांग किसान का घर सील किया
विधायक बच्चू कडू ने मौके पर पहुंचकर हथौड़े से ताला तोड़ डाला
किसान परिवार को उनका घर वापस दिलाकर न्याय की मांग की
Akola Finance Company Seal House Lock Broken Bachchu Kadu: महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक दिल को झकझोर देने वाली अमानवीय घटना सामने आई है। जिले के बालापूर तालुका स्थित निंबा गांव में एक फाइनेंस कंपनी ने बकाए कर्ज की वसूली के नाम पर अदालत के आदेश से किसान के घर को सील कर दिया था।
इसके कारण 60 प्रतिशत दिव्यांग किसान गोपाल राठौड़ और उनके परिवार को अपनी मासूम बेटियों के साथ कड़ाके की ठंड में दो-तीन दिनों तक खुले आसमान के नीचे रात बिताने पर मजबूर होना पड़ा। इस घटना की खबर मिलते ही विधायक बच्चू कडू भड़क उठे और उन्होंने खुद गांव पहुंचकर हथौड़े से कंपनी का सील किया हुआ ताला तोड़ डाला।
अकोला जिले के निंबा गांव के अल्पभूधारक किसान गोपाल राठौड़ के पास महज दो एकड़ जमीन है। लगातार नापिकी और सूखे के कारण उनकी खेती बर्बाद हो गई थी और आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। कोरोना काल में उनके बड़े बेटे की मृत्यु हो गई थी और उनके पिता का छत्र भी पहले ही उठ चुका था।
गोपाल राठौड़ ने वर्ष 2018 में 'महिंद्रा रुरल हाउसिंग फाइनेंस' कंपनी से 1 लाख रुपये का होम लोन लिया था। अपनी बेबसी के बावजूद उन्होंने 44,000 रुपये की किस्तें ईमानदारी से चुकाई थीं। लेकिन इसके बाद खेती में हुए नुकसान के कारण वे बाकी किस्तें नहीं भर पाए। इसके बाद फाइनेंस कंपनी ने कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के आदेश का हवाला देकर उनके घर पर जब्ती की कार्रवाई की और ताला लगाकर सील कर दिया।
घर सील हो जाने से गोपाल राठौड़ और उनका परिवार पूरी तरह असहाय हो गया। जिस घर में उन्होंने सालों-साल अपना संसार बसाया था, उसी घर के दरवाजे पर बैठकर उन्हें अपने छोटे बच्चों के साथ उघड़े में रातें गुजारनी पड़ीं। बेबस किसान परिवार की यह हालत देखकर गांव वालों के बीच भी भारी गुस्सा फैल गया था।
इस घटना की जानकारी मिलते ही विधायक बच्चू कडू अपने समर्थकों के साथ सीधे निंबा गांव पहुंचे। परिस्थिति की समीक्षा करने के बाद उन्होंने बिना किसी परवाह के हाथ में हथौड़ा उठाया और कंपनी द्वारा लगाया गया ताला तोड़ दिया। ताला टूटते ही उन्होंने राठौड़ परिवार को सम्मान के साथ घर में प्रवेश कराया, जिससे परिवार के लोग भावुक होकर रो पड़े।
बच्चू कडू ने फाइनेंस कंपनी और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, कर्ज थक गया तो क्या इंसानियत भी खत्म हो गई? उन्होंने सवाल उठाया कि गरीब और दिव्यांग किसान के सिर से छप्पर छीनना कौन सा न्याय है?
बच्चू कडू ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, अगर इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज करना है, तो कंपनी और प्रशासन पहले मेरे खिलाफ मामला दर्ज करे। उन्होंने साफ किया कि यदि जरूरतमंद किसानों को प्रताड़ित किया जाएगा, तो उनका हथौड़ा हमेशा तैयार रहेगा। किसान के आत्महत्या करने से पहले उसके घर पहुंचकर ताला तोड़ा जाएगा।
इस पूरी घटना ने विदर्भ में किसानों की बदहाली, सूखे के संकट और निजी फाइनेंस कंपनियों द्वारा की जा रही कठोर कर्ज वसूली के मुद्दे को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।