अकोला विधानसभा चुनाव, फर्जी मतदान, हाई कोर्ट,(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
अकोला

अकोला विधानसभा चुनाव में फर्जी वोटिंग का आरोप; हाई कोर्ट सख्त, चुनाव अधिकारी को रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश

Akola Assembly Election Petition: अकोला विधानसभा चुनाव में कथित फर्जी मतदान के आरोपों पर दायर याचिका की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने चुनाव अधिकारी को सभी चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

अंकिता पटेल

Akola Fake Voting Case: नागपुर अकोला विधानसभा चुनाव में हुए कथित फर्जी मतदान को लेकर विजय कमलकिशोर अग्रवाल की ओर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया जिस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे ने चुनाव रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश चुनाव अधिकारी को दिया।

वर्ष 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान विशेष रूप से अकोला विस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी साजिद खान पठान और भाजपा के प्रत्याशी विजय अग्रवाल के बीच कड़ी टक्कर हुई थी जहां साजिद खान पठान को 88,718 वोट मिले थे वहीं अग्रवाल को 87,435 वोट मिले थे।

परिणामों के बाद चुनाव में फर्जी वोटिंग होने के आरोप लगाते हुए भाजपा प्रत्याशी अग्रवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से गंभीर आरोप लगाया गया है कि हजारों मतदाताओं ने 2 अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में एक से अधिक बार मतदान किया है।

एक ही मतदाता, 2 जगह वोट

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि कम से कम 1,125 मतदाताओं के नाम '30-अकोला पश्चिम' और '29-बालापुर' दोनों विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक साथ मौजूद थे।

इन मतदाताओं की तस्वीरें दोनों सूचियों में मेल खाती हैं और उन्होंने दोनों स्थानों पर मतदान किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन सभी लोगों ने अकोला विधानसभा क्षेत्र में मतदान करते हुए साजिद खान पठान के पक्ष में अपने वोट डाले। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि 20 नवंबर 2024 को 3,614 मतदाताओं ने एक से अधिक बार मतदान किया।

कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन

याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(3) का हवाला देते हुए कहा है कि कोई भी व्यक्ति एक ही चुनाव में एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में वोट नहीं डाल सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके सभी वोट शून्य माने जाएंगे।

मतदाता सूची पर नहीं उठा सकते सवाल

साजिद खान पठान की और से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जुगलकिशोर गिल्डा ने दलील दी कि चुनाव याचिका के माध्यम से मतदाता सूची पर सवाल नहीं उठाया जा सकता क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार यह कानूनन वर्जित है।

अदालत ने माना कि यह कानून स्थापित है कि चुनाव याचिका में मतदाता सूची को चुनौती नहीं दी जा सकती लेकिन इस मामले में याचिकाकर्ता मतदाता सूची को चुनौती नहीं दे रहा है बल्कि एक ही मतदाता द्वारा 2 अलग-अलग क्षेत्रों में 2 बार वोट डालने के अवैध कृत्य पर जोर दे रहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी दलील कानून द्वारा वर्जित नहीं है और प्रतिवादी की आपत्ति याचिका को खारिज कर दिया।

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