Akola Agriculture College: डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित अकोला कृषि महाविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग, मूल फाइलें गायब करने तथा सरकारी नियमों की अनदेखी कर लाखों रुपये के भुगतान में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।
इस संबंध में कृषि महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. संजय भोयर ने एमआईडीसी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कर तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों तथा संबंधित निजी ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा 17 जून 2026 और 24 जुलाई 2026 को जारी आदेशों तथा सात अलग-अलग जांच समितियों की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे।
जांच में वित्तीय लेन-देन, भुगतान प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि ठेकेदार संतोष म्हातारमारे के 23 प्रलंबित बिलों की जांच की गई। जांच के दौरान कई दस्तावेज अपूर्ण, संदिग्ध और कथित रूप से फर्जी पाए गए। इनमें से तीन बिलों का भुगतान पहले ही किया जा चुका था, जबकि शेष 20 बिलों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान महाविद्यालय में शिक्षण, प्रयोगशालाएं और अधिकांश प्रशासनिक कार्य बंद थे. इसके बावजूद संबंधित ठेकेदार को 13.32 लाख रु. से अधिक का भुगतान किया गया, जिससे इन भुगतानों पर भी संदेह जताया गया है। जांच समितियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ निर्माण और मरम्मत कार्य विश्वविद्यालय के अभियंता कार्यालय से आवश्यक तकनीकी स्वीकृति लिए बिना कराए गए।
इसके अलावा 50 हजार रु. से कम राशि के कोटेशन दिखाने के लिए कार्यों को विभाजित कर वित्तीय नियमों को दरकिनार करते हुए भुगतान स्वीकृत किए जाने का भी आरोप लगाया गया है. जांच में एक ही कार्य और एक ही वाउचर क्रमांक पर नौ बार दोहराकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार इससे विश्वविद्यालय को लगभग 5.31 लाख रु. का आर्थिक नुकसान हुआ।
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लेखापरीक्षण के दौरान कुल 97 फाइलें उपलब्ध नहीं कराई गई। इनमें 41 फाइलें संबंधित ठेकेदार के भुगतानों से जुड़ी थीं। जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2018 से 2021 के बीच नियमों का उल्लंघन कर लगभग 95.84 लाख रु. का भुगतान किया गया।