Ujjain Siddhivinayak Ganesh Temple : उज्जैन के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गणेश उत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। भगवान गणेश के जन्मोत्सव पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, पंचामृत अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा और गणपति के जयकारों से परिसर गूंजता रहा।
प्रात:काल भगवान सिद्धिविनायक का पंचामृत अभिषेक करने के बाद उनका विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को स्वर्ण आभूषण धारण कराए गए। वहीं, मंदिर परिसर को भी गणेश उत्सव के लिए विशेष रूप से सजाया गया था। स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर की गई सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। भक्तों ने भव्य सजावट के बीच भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
गणेश उत्सव के अवसर पर भगवान सिद्धिविनायक को 5 लाख 51 हजार मोदक लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया गया। बड़ी संख्या में मोदक का भोग लगाए जाने से मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन का माहौल रहा। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को मोदक प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद पाने के लिए भक्तों में खास उत्साह देखने को मिला।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बेटे वैभव यादव भी शामिल हुए। उन्होंने भगवान सिद्धिविनायक की महाआरती की और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से श्रद्धालुओं को मोदक प्रसाद वितरित किया। गणेश उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरा माहौल भक्ति से सराबोर नजर आया।
श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर अपनी मौली धागे की मान्यता के लिए भी प्रसिद्ध है। महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचने वाले कई श्रद्धालु भगवान सिद्धिविनायक के दर्शन करने के साथ यहां रक्षासूत्र बंधवाते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ मौली धागा बंधवाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के चलते यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
मंदिर की स्थापना को लेकर प्राचीन मान्यता राजा भरथरी से जुड़ी है। कहा जाता है कि पुराने समय में श्रद्धालु चिंतामन गणेश और सिद्धिविनायक गणेश का आशीर्वाद लेने के बाद ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए जाते थे। समय के साथ उज्जैन की व्यवस्थाएं और रास्ते बदले, लेकिन सिद्धिविनायक गणेश मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था आज भी कायम है। गणेश उत्सव में उमड़ी भीड़ ने इस धार्मिक परंपरा की गहरी पकड़ को फिर सामने ला दिया।